युद्ध, हिंसा और तनाव में दोनों पक्ष ही हारते हैं
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राष्ट्रीय परिदृश्य

युद्ध, हिंसा और तनाव में दोनों पक्ष ही हारते हैं

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर

चेयरपर्सन अवेयर ट्रस्ट

22 अप्रैल 2025 को काश्मीर के पहलगाम की बाइसरान  घाटी में आतंकवादियों ने 26 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या कर दी, जिस से पूरा देश दहल गया और दुनिया भर में इस दुख को महसूस किया गया और कड़ी निंदा की गई। जिन परिवारों ने इस हमले में अपनों को खोया उनके दुख और विपदा की तो हम कल्पना भी नहीं कर सकते। इस निर्मम हत्या कांड की आड़ में  कुछ देश और समाज विरोधी तत्वों और मीडिया के एक वर्ग ने देश में धर्म की बुनियाद पर नफरत फैलाने की कोशिश भी की जिसे भारत की जनता ने एक जुट होकर नाकाम कर दिया। इस आतंकी हमले के समय मौजूद स्थानीय कश्मीरी ग़रीब मुसलमानों ने अपनी जान पर खेल कर और कुछ ने अपनी जान कुर्बान करके सैलानियों की मदद की और उनको सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया और  नफ़रत और घृणा के दानव को प्रेम और इंसानियत की ताकत से परास्त कर दिया। 

आतंकवाद अर्थात निर्दोष लोगों की हत्याएं करके भय और आतंक फैलाना किसी भी स्तिथि में संपूर्ण मानव जाति के खिलाफ एक घिनौना अपराध है। आतंकवाद चाहे वह किसी भी रुप में हो और वह चाहे किसी की भी तरफ से हो उसे पूरी दृढ़ता से समाप्त किया जाना चाहिए। हमारे देश भारत और उसके आस पास के क्षेत्र में विगत कई दशकों से आतंकवाद एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, इस चुनौती का मुक़ाबला पूरे साहस, मजबूत इच्छा शक्ति, ईमानदारी, और सभी प्रकार के पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर और पूरे देश व समाज के हर वर्ग को साथ लेकर ही किया जाना संभव है। आतंकवाद को किसी भी धर्म से जोड़ना बहुत ही अन्याय पूर्ण है और पिछले काफी समय से यह अन्याय कहीं अज्ञानतावश और कहीं जानबूझ कर किया जाता रहा है, इस सोच और आचरण की वजह से वास्तविक आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के प्रयासों को चोट पहुँचती रही है। आतंकवाद की समाप्ति के अभियान में तात्कालिक राजनीतिक फायदे तलाश करने की कोशिशें देश और समाज के हितों पर बड़ा कुठाराघात होगा। आतंकवाद और उसके विस्तार के वास्तविक कारणों और उसको समाप्त करने की हमारी रणनीतियों की सफलता या असफलता का पूरी निष्ठा से समय समय पर विश्लेषण करते हुए उसमे सुधार लाने के प्रयास भी करते रहने होंगे। 

पहलगाम आतंकी हमले के बाद आतंक के खिलाफ़ पूरा देश एकजुट था और अपेक्षा करता था की इस अमानवीय घटना को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को पकड़ कर सज़ा दी जाती। उन आतंकियों को तैयार करने और संरक्षण देने वालों की भी पहचान करके उनको भी ऐसी सज़ा दी जाती की भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृति की संभावनाओं को भी समाप्त किया जा सके।

हमारे देश की सेनाओं की ओर से समुचित कार्यवाही की गई। नियंत्रण रेखा के उस पार से भी जवाबी कार्यवाही हुई दोनों देश पूर्णतः युद्ध की ओर तेज़ी से बढ़ रहे थे। खुशी की बात है की जल्द ही युद्ध विराम का निर्णय हुआ, और दोनों देश एक बड़े खतरे को टालने में सफल हुए, लेकिन समस्या का वास्तविक और स्थाई हल अभी होना बाक़ी है। 

22 अप्रैल के बाद से भारत और पाकिस्तान का मुख्य धारा मीडिया दोनों तरफ की सेनाओं से ज्यादा एक दूसरे पर हमले कर रहा था। हालांकि हमारे सैन्य अधकारियों और विदेश मंत्रालय की मीडिया ब्रीफिंग बहुत संयमित थी। दोनों ओर के मीडिया की ओर से बड़े बड़े दावे किए जा रहे थे। इस मीडिया युद्ध ने मीडिया की विश्वसनीयता को बहुत नीचे तक गिरा दिया था। मीडिया की विश्वसनीयता का गिर जाना किसी भी लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान है।     

सीमा पार से हो रही आतंकी गतिविधियां भारत के लिए  बहुत बड़ी चुनौती है और दौनों देशों के बीच खराब संबंधों की एक बड़ी वजह है। पाकिस्तान को बड़ी गम्भीरता और ईमानदारी के साथ इन गतिविधियों को रोकने का प्रयास करना होगा। साथ ही दोनों देशों को बिना किसी बिचौलिए के कश्मीर के मसले को भी गंभीरता से लेते हुए इस मुद्दे पर संवाद करना होगा। कश्मीर की आम जनता को भी विश्वास में लेना होगा। न्याय और शांति के सिद्धांतों को आधार बनाकर किसी व्यवहारिक हल तक पहुँचने का प्रयास करना होगा। अब तक कई प्रयास हुए लेकिन कभी विदेशी ताकतों और कभी आंतरिक कारणों से दोनों पड़ोसी देश हर बार स्थाई हल के बहुत करीब आकर भी असफल हो गए। कई विदेशी और बड़ी ताक़तें नहीं चाहती कि दोनों देशों के बीच स्थाई शांति हो, क्योंकि उनको अपने हथियारों का व्यापार करना है और साथ ही अपना प्रभाव भी बनाए रखना है। बाहरी शक्तियों के इस मंसूबे और साजिशों को समझते हुए दोनों देशों को अपने हितों की रक्षा करते हुए स्थाई शांति की ओर बढ़ना होगा। साथ ही दोनों देशों की चरमपंथी और नफरती सोच को नियंत्रण में रखना भी सरकारों का दायित्व है।        

युद्ध और हिंसा के रास्ते से कभी भी किसी समस्या का स्थाई हल और स्थाई शांति का स्थापित होना असंभव है, युद्ध और उसके नतीजे मे होने वाली तबाही के बाद भी केवल वार्तालाप ही से हल तक पहुंचा जा सकता है, यह बात दोनों देशों को अच्छी तरह समझनी होगी। 

भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों की जनता का बहुत बड़ा हिस्सा चाहता है की दोनों ही देशों के रिश्ते मधुर हों, दोनों के बीच एक साझा विरासत, संस्कृति और भाषाओं की बहुत हद तक समानता है, दोनों ओर साझा धर्म स्थल हैं लेकिन पिछले कुछ सालों से रिश्तों में कटुता है, उसके कारण भी ठोस हैं लेकिन इस तनाव और वैमनष्यपूर्ण स्थिति के लंबे समय तक जारी रहने की बहुत बड़ी कीमत दोनों चुका रहे हैं और आगे भी चुकानी होगी। इस स्तिथि के कारण दोनों देशों को रक्षा बजट पर बहुत भारी खर्च करना पड़ रहा है, जिस कारण हथियारों के सौदागरों के राजस्व में निरंतर वृद्धि हो रही है। रक्षा बजट पर ख़र्च होने वाली यह भारी रक़म आम जनता की आर्थिक स्तिथि को बेहतर बना सकती है। रिश्ते अच्छे होने की स्तिथि में व्यापारिक संबंध भी बहाल होंगे और हमारी प्रगति और समृद्धि की रफ्तार भी तीव्र हो जाएगी।

हालांकि स्तिथियां इस समय बहुत गंभीर हैं, हमारी ये बातें बहुत से लोगों को यथार्थ से बहुत दूर लग सकती हैं, लेकिन यह असंभव नहीं है। हम को निराश नहीं होना चाहिए और निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। स्तिथियों को सुधारने में मुख्य भूमिका तो सरकारों की ही होती है, लेकिन आम जनता  अगर जागरूक हो तो सरकारों को देशहित में साहसिक निर्णय लेने पर मजबूर होना ही पड़ता है।                                   

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