...जब देश की संसद में वक्फ कानून पर चर्चा हुई
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राजनीति

...जब देश की संसद में वक्फ कानून पर चर्चा हुई

जब संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत हुई तभी से देश में एक हलचल शुरु हो चुकी थी। ऐसा लग रहा था मानो सबको पहले से मालूम है कि इस बार के संसद सत्र में वक्फ बिल कानून का रुप ले ही लेगा। इसलिए इस बार का संसद सत्र बहुत ही महत्वपूर्ण था और लगभग हर भारतीय को इस सत्र के शुरु होने का बेसब्री से इंतज़ार था। सत्ता एवं विपक्षीय दल पहले से बहस की पूरी तैयारी में जुटे हुए थे। फिर हुआ भी यही कि सत्र की शुरुआत हुई और सरकार ने 2 अप्रैल को संसद में वक्फ बिल पेश किया। 

सरकार द्वारा वक्फ बिल पर चर्चा हेतु 8 घंटे का समय निर्धारित किया गया था। परंतु विपक्षीय दलों की मांग के बाद अंततः 13 घंटे इस बिल पर लोकसभा में चर्चा हुई। जिसमें अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बिल पर सरकार का पक्ष रखते हुए वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को मुस्लिम महिला, मुस्लिम पिछड़ा वर्ग के लिए लाभप्रद बताते हुए कहा कि, मुझे उम्मीद ही नहीं, यकीन है कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं उनके दिल भी परिवर्तित होंगे और अंत में वे भी इस बिल का समर्थन करेंगे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ना केवल वक्फ बिल के पक्ष में सरकार की ओर से मज़बूत पैरवी कर रहे थे बल्कि अपनी बातों को बल देने के लिए साहित्य का भी सहारा ले रहे थे। इसी क्रम में उन्होंने एक पंक्ति भी सदन में प्रस्तुत कीः- 

किसी की बात को कोई बदगुमां न समझे

कि ज़मी का दर्द कभी आसमां न समझे

उन्होंने यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि, मुझे हैरानी होती है कि वर्ष 2013 में यूपीए सरकार ने वक्फ बोर्ड को ऐसा अधिकार दे दिया कि वक्फ बोर्ड के आदेश को किसी सिविल अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। यदि यूपीए सरकार आज सत्ता में होती तो संसद की इमारत, एयरपोर्ट समेत पता नहीं कितनी प्रापर्टी को वक्फ संपत्ति घोषित किया जा चुका होता।

इसके पश्चात विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने इस विधेयक पर लंबी बहस की। उन्होंने किरेन रिजिजू का जवाब देते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री ने जो यूपीए सरकार के बारे में टिप्पणी की है वह पूरी तरह झूठ और मिसलीड करने वाली है। यह बात पूरी तरह बेबुनियाद है।

उन्होंने आगे कहा कि, इस सरकार के केवल चार उद्देश्य हैं। संविधान को कमज़ोर करना, भ्रम फैलाना, अल्पसंख्यकों को बदनाम करना, भारतीय समाज को बांटना और चौथा उद्देश्य अल्पसंख्यकों को उनके अधिकार से वंचित करना।

जहां सत्ता पक्ष वक्फ संशोधन अधिनयम 2025 पर भावना एवं भ्रम को आधारशिला बनाकर अपना पक्ष रख रहा था वहीं विपक्षीय दलों की ओर से भी सदस्य मज़बूत तर्क एवं बिल के संवैधानिक पक्ष पर मज़बूती से बिल का विरोध कर रहे थे। जिसमें गौरव गोगोई के अतिरिक्त मुख्य रुप से सपा प्रमुख अखिलेश यादव, मोहिबुल्लाह नदवी, इकरा हसन, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, इमरान मसूद इत्यादि ने भी अपना पक्ष रखा। परंतु संख्याबल के आधार पर यह बिल लोकसभा में 288 मतों के साथ पास हो गया। जबकि इस बिल के विरोध में 232 वोट पड़े।

लोकसभा से पास होने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दूसरे दिन राज्यसभा में इस बिल को पेश किया। जहां एक बार फिर इसका ज़ोरदार विरोध देखने को मिला। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस के विरोध में ज़ोरदार चर्चा की। 

हम ही को कातिल कहेगी दुनिया

हमारा ही कत्ल-ए-आम होगा

हम ही कुएं खोदते फिरेंगे

हम ही पर पानी हराम होगा

इस शेर के साथ अपने भाषण की शुरुआत करते हुए इमरान प्रतापगढ़ी ने संसद में कहा कि. 1947 में दिल्ली की जामा मस्जिद की ऐतिहासिक सीढ़ियों पर खड़े होकर भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने कहा था, मुसलमानों कहां जा रहे हो? यह है तुम्हारा मुल्क, यहां तुम्हारे पुर्वजों की कब्रें हैं उस वक्त मौलाना आज़ाद की सदाएं सुनकर लोगों ने अपने सिरों की गठरियां उतारकर रख दी थीं। आज उसी दिल्ली में मौजूद देश की संसद में एक बिल आया है जो हमसे उसी जामा मस्जिद की सीढ़ियों के सबूत मांगेगा।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि, दो दिनों से मुस्लिमों की इतनी चिंता की जा रही है जितनी जिन्ना ने भी नहीं की थी। मुस्लिमों की इतनी चिंता हो रही है बीजेपी को कि इससे हिंदू और मुस्लिम दोनों डरे हुए हैं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, यह बिल लोगों का ध्यान भटकाने का तरीका है। कल ट्रंप ने टैरिफ लगाया, उस पर चर्चा होनी चाहिए थी लेकिन आप ध्यान भटकाने के लिए यह बिल लेकर आ गए।

राज्यसभा में भी इस बिल पर 12 घंटे की लंबी चर्चा हुई। जिसमें सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, सुंधाशु त्रिवेदी, जेपी नड्डा ने चर्चा में भाग लिया तो वहीं विपक्ष की ओर से इमरान प्रतापगढ़ी, संजय राउत के अतिरिक्त, मल्लिका अर्जुन खड़गे, अशोक गहलोत, राजीव शुक्ला ने इस बिल का पुरज़ोर विरोध किया। 12 घंटे की बहस के बाद राज्यसभा में यह बिल 128 मतों से पास हो गया। वहीं इसके विरोध में 95 मत पड़े। दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति के अनुमोदन से यह बिल वक्फ सशोंधन अधिनियम 2025 के रुप में 8 अप्रैल 2025 से प्रभावी हो गया।

संपादन प्रभाग

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