“मुस्लिम महिलाओं की विलुप्त हुई विरासत को पुनः प्राप्त करने का आह्वान”
नई दिल्ली में आयोजित “हिस्ट्री कांफ्रेंस” के एक सत्र ‘इतिहास में महिलाओं की भूमिका’ के समापन भाषण में, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद महिला विंग की राष्ट्रीय सचिव रहमतुन्निसा अब्दुरज़्ज़ाक़ ने भारत के अतीत और वर्तमान को गढ़ने में मुस्लिम महिलाओं के योगदान पर चर्चा की जिन्हें अकसर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
प्रोग्राम में भाग लेने आए सभी वक़्तागण का आभार जताते हुए उन्होंने वर्तमान समय में ऐतिहासिक सत्य को पुनः स्थापित करने की प्रासंगिकता पर ज़ोर दिया और कहा कि एक ऐसे समय में जब तेज़ी से कुछ लोगों द्वारा झूठे नैरेटिव बिल्डिंग का काम हो रहा हो इसकी सख्त आवश्यकता है। उन्होंने लोगों को जॉर्ज ऑरवेल का प्रसिद्ध कथन याद दिलाया जिसमें कहा गया है कि “लोगों को नष्ट करने का सबसे प्रभावी तरीका यह है कि उनके इतिहास की समझ को नकार दिया जाए और मिटा दिया जाए।”
उन्होंने कहा कि यह मात्र अतीत की चेतावनी नहीं है, बल्कि समकालीन समय में सामने आ रही एक ऐसी सच्चाई है जहां तथ्यों को अकसर मिटा दिया जाता है और उनकी जगह अपनी सुविधा के अनुसार गढ़ी गई झूठी कहानियों को स्थापित कर दिया जाता है।
मिटते हुए ऐतिहासिक तथ्यों को पुनर्जीवित करने की चुनौती
प्रामणिक तथ्यों को पुनर्जीवित करने में अकादमिक मंचों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने वर्तमान को अतीत की सच्ची समझ से जोड़ने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के बौद्धिक माहौल में अकसर वैचारिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ही आख्यान गढ़े जाते हैं, जिससे सूक्ष्म और समावेशी इतिहास के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है।
इस संदर्भ में महिलाओं, विशेषरुप से मुस्लिम महिलाओं का योगदान काफी हद तक अदृश्य ही बना रहता है। ऐसे समाज में रहने के बावजूद जिसे अकसर प्रगतिशील और लोकतांत्रिक बताया जाता है, सार्वजनिक विमर्श का झुकाव अंसतुलित रुप से नकारात्मक चित्रणों की ओर ही रहता है, जबकि रचनात्मक भूमिकाओं को या तो हाशिए पर डाल दिया जाता है या फिर पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
अगली पीढ़ी के लिए आह्वान
अपने संबोधन के समापन पर श्रीमती रहमतुन्निसा अब्दुररज़्ज़ाक ने दो मुख्य बातें सामने रखीं। पहली यह कि मुस्लिम महिलाओं की विरासत को दस्तावेज़ की शक्ल में एकत्र करने की आवश्यकता है जिसके लिए तुरंत कार्य शुरु हो जाना चाहिए तथा निरंतर प्रयास होते रहना चाहिए। इसके लिए शोध, प्रकाशन एवं निवेश की आवश्यकता है। केरल में कुछ क्षेत्रीय संगठनों ने इस प्रकार के कार्य शुरु कर दिए हैं और अब पूरे देश में इस पर कार्य होना चाहिए
इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज को उसकी सामूहिक ज़िम्मेदारी याद दिलाई। कुरआन की आयत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि, अच्छाई को बढ़ावा देने और बुराई रोकने में पुरुष और महिला दोनों की भूमिका आवश्यक है। यह एक नैतिक कर्तव्य है जो सामाजिक प्रगति के मूल में निहित है।
Headline: भारतीय मुस्लिम इतिहास की झलक दिखी “द वोवन लैंड” में
14 अप्रैल 2026 से 19 अप्रैल 2026 के बीच ओख़ला के अबुल फज़ल एन्क्लेव में स्थित जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में “द वोवन लैंड : भारत में मुस्लिम इतिहास की एक दृश्य गाथा” नामक एक अनोखी और जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इंडियन हिस्ट्री फ़ोरम द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में भारतीय इतिहास में मुस्लिम योगदान को पेटिंग, चित्र व क्रॉफ्ट के द्वारा प्रदर्शित किया गया।
बेहद रचनात्मक रुप से तैयार किए गए प्रदर्शनों और मॉडलों की मदद से शिक्षा, व्यापार, सामाजिक समानता, महिला सशक्तिकरण और प्राचीन ग्रंथों के अनुवाद में मुसलमानों की भूमिका को दर्शाया गया। वास्तुकला, संस्कृति, भाषा के विकास, विज्ञान और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में हुए विकास और योगदान को भी प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षणों में से एक इसका जीवंत 360 डिग्री अनुभाव है, जिसे आगंतुकों को इतिहास की एक गतिशील यात्रा से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया। यह इंस्टॉलेशन कहानी कहने की कला को दृश्य तत्वों के साथ जोड़ता है, ताकि उस साझा विरासत और सांस्कृतिक समन्वय की गहरी समझ विकसित की जा सके जिसने सदियों से भारतीय समाज को आकार दिया है।
इस प्रदर्शनी का उद्घाटन अजमेर शरीफ दरगाह की अंजुमन कमेटी के सचिव मौलाना सैय्यद सरवर चिश्ती, मौलाना असगर अली इमाम मेहदी, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता शमशाद आलम ने किया। इस मौके पर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैय्यद सआदतुल्लाह हुसैनी समेत अन्य बुद्धिजीवी मौजूद रहे।