भारत में गर्मी का मौसम और बचने के उपाय
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भारत में गर्मी का मौसम और बचने के उपाय


भारत की भौगोलिक विविधता जहां इसे प्राकृतिक सुंदरता से भर देता हे वही यहां की गर्मी अपने आप में एक अलग ही पहचान रखती है। जब हम अपने देश की गर्मी की बात करते हैं तो यह केवल ऊंचे तापमान का विषय नहीं रह जाता बल्कि यह हमारे जीवन संस्कृति, अर्थव्यवस्था, और हमारे अस्तित्व तक की चुनौतियों से जुड़ जाता है।

 भारत में वर्तमान गर्मी की स्थिति केवल एक मौसमी बदलाव नहीं बल्कि प्रकृति की ओर से दी गई एक गंभीर चेतावनी है। यह हमें बता रही है अगर हमने प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठाया तो भविष्य की गर्मियां असहनीय हो सकती है इसलिए हमें अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने और पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाने की सख्त आवश्यकता है।

 2026 की गर्मी पर "अलनीनो" का प्रभाव काफी चर्चा में है यह एक जटिल समुद्री और वायुमंडलीय घटना है जो प्रशांत महासागर में होती है। वैसे तो इसका प्रभाव पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है पर एल नीनो के कारण भारत में गर्मियों का सीजन अधिक लंबा और भीषण हो जाता है यह हीट वेव्स की आवृत्ति को बढ़ा देता है जिससे स्वास्थ्य पर भी भारी प्रभाव होता है। 

 भारत में गर्मी बढ़ने के कई मुख्य कारण है जैसे कि शहरीकरण, अधिकांश गांव विकास के नाम पर कंक्रीट के नगर बन गए हैं। विकास के नाम पर वनों की कटाई हो रही है बहुत ज्यादा मात्रा में एक साथ वृक्षों को काटा जा रहा है जो वाकई में चिंता का विषय है। बढ़ती हुई फैक्ट्रियां और बढ़ता हुआ ट्रैफिक भी तापमान को बढ़ाने में बहुत बड़ा रोल अदा कर रहा है। 

शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अभी भारत रिकॉर्ड तो गर्मी का अनुभव कर रहा है जो इसे वैश्विक लू का केंद्र बना रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से लगभग 95 शहर भारत के हैं दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में तापमान 45 से 50 डिग्री पार कर जाता है। आजकल भारत को 'हिटडॉम' की उपमा भी दी जा रही है।

 भारत में गर्मी की व्यवस्थित रिपोर्टिंग और रिकॉर्डिंग 1901 से शुरू हुई, तब से अब तक सबसे ज्यादा तापमान 2024 में रिकॉर्ड किया गया। 2024 के रिपोर्ट के अनुसार पूरे भारत में हीट स्ट्रोक के 40,000 से 48,000 कैसे सामने आए हैं जिसमें 200 से 300 लोगों की मौत रिकॉर्ड हुई थी। बच्चे, किसान, मजदूर और खुले आसमान के नीचे कच्चे मकान में रहने वाले लोग ऐसी हीट वेव्स से ज्यादा प्रभावित होते हैं। 

 भारत में बढ़ती गर्मी के चलते हीट वेव्स से बचने के लिए हर व्यक्ति को सामान्य उपाय सीख लेने जरुरी हो चुके हैं। हम उसके बारे में यहां कुछ उपाय आप तक पहुंचाना जरूरी समझते हैं।

1) हाइड्रेटेड रहे: प्यास ना लगने पर भी समय-समय पर पानी पीते रहे। नारियल पानी, नींबू पानी भी ले सकते हैं पर सादे पानी का कोई बदल नहीं है।

2) धूप से बचें: दोपहर को 11 से 5 के बीच डायरेक्ट सनलाइट में जाने से बचें। इस समय सूरज की किरणें सीधी धरती पर पड़ती है जो हमें ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।

3) सही पहनावा पहने: ढीले और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, सर को ढक कर रखे, पांव में आरामदायक जूते पहने।

4) अपने भोजन का खास ख्याल रखेः ताजा घर में बना हुआ कम तेल मसाले वाला खाना ही लेना पसंद करें, पानी से भरे हुए फल और सब्जियों का खूब इस्तेमाल करें। 

5) यदि किसी व्यक्ति को भ्रम, चक्कर आना, तेज सर दर्द, वोमिट या 104 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा बुखार जैसे लक्षण दिखे तो वह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है तुरंत ही डॉक्टर का संपर्क करें।

अगर हम कुछ सुन्नत तरीकों को देखें तो डिहाइड्रेशन का मोहम्मद सल्ल० ने खूब बेहतरीन इलाज बताया है। जैसे कि नबीज यानी खजूरों को रात भर पानी में भिगो ले और सुबह वह पानी का इस्तेमाल करें। 

दूसरे भी कई उपाय तिब्बेनबवी में हमें मिलते हैं। जैसे की शहद का पानी, इमली और गुड़ का पानी, सौंफ का पानी इन सबको भी रात को भिगोकर सुबह पीने से डिहाइड्रेशन में राहत होती है। मिट्टी के बर्तनों में पानी को स्टोर करके उसका इस्तेमाल करें यह भी हमारी सेहत के लिए फायदेमंद रहता है। एक इंसान एक पेड़ जरूर लगाए अपने घरों के आसपास थोड़ी ऐसी जगह जरूर रखें या तो टेरेस गार्डनिंग या बालकनी गार्डनिंग भी कर सकते हैं।

 अंत में यह कहा जा सकता है कि भारत की बढ़ती गर्मी हमारे लिए एक चेतावनी भी है और एक सीख भी जहां एक ओर यह मौसम हमारे कृषि और जल चक्र के लिए आवश्यक है वहीं दूसरी ओर यह हमें पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण की याद दिलाती है। गर्मी की यह तपन हमें यह एहसास कराती है की प्रकृति का संतुलन बनाए रखना हमारे अस्तित्व के लिए कितना अनिवार्य है।


डॉक्टर तसनीम वोहरा

गुजरात

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