आभा की वर्षगांठ : सफलता एवं चुनौतियां
आभा का 13 वाँ अंक प्रस्तुत करते हुए मन बहुत प्रफुल्लित है, इस अंक के साथ आभा ई मैग्ज़ीन अपने सफर का एक वर्ष पूर्ण कर रही है। एक साल पहले इसी माह से इस पत्रिका का आरंभ हुआ था।
आभा नारी विमर्श की नई दिशा का प्रतीक है, एक वर्ष पूर्व यह दृढ़ निश्चय किया गया कि आभा घर से समाज तक महिलाओं की आवाज बने, महिला आधारित मुद्दों पर विमर्श खड़ा किया जाए और समय के सापेक्ष वैचारिक,आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पारिवारिक और सामाजिक विषय वस्तु लोगों तक पहुंचाई जाए।
यह एक वर्ष संघर्ष, उम्मीदों, विचारों के परिपक्व होने, संवाद और परिवर्तन की सतत् यात्रा का रहा। हम सदैव इस बात के लिए प्रयासरत्त रहे कि आभा में केवल मुद्दों को प्रकाशित नहीं किया जाए बल्कि उन सहमी आवाजों और अनकहे किस्सों को बयान किया जाए जो घर की दहलीज़ के बाहर नहीं निकलते, जो मीडिया की हाहाकार में दब जाते हैं।
आभा केवल आलेख का समूह नहीं बल्कि विचारों पर मंथन, संवाद, विविध दृष्टिकोणों और समाज में नई सोच लाने का मंच है क्योंकि शब्द केवल शब्द नहीं परिवर्तन की शक्ति होते है और हम उम्मीद करते हैं कि आभा के माध्यम से परिवर्तन की एक नई दास्तां लिखेंगे।
यह प्रथम वर्षगांठ एक पड़ाव नहीं बल्कि आगे और बेहतर करने का दृढ़विचार है। हमारे लिए आभा की शुरुआत एक दीप जलाने जैसी हुई, टिमटिमाता हुआ लेकिन कभी ना बुझने का साहस लिए हुए। जिसकी रौशनी प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और इंशाअल्लाह आगे भी बढ़ती रहेगी और ये दीप भारत में अपने विचारों से चौतरफा रौशनी बिखेरेगा।
एक वर्ष पहले हमने महसूस किया कि महिला विमर्श कोई विषय नहीं बल्कि जीवंत अनुभव है जिसको समाज तक शब्दों की डोर के माध्यम से लाया जाए। इसलिए हमने आभा में उन कहानियों को भी प्रस्तुत किया जो कभी घर की चौखट के बाहर नहीं निकली, उन मुद्दों को उठाया गया जो आज के डिजिटल युग में कही मध्यम पड़ जाती है।
पिछले एक वर्ष में हम आभा के माध्यम से उन मुद्दों को समाज के सामने लाए जो आज की ज्वलंत सच्चाई है : घरेलू हिंसा , मानसिक उत्पीड़न, शिक्षा, जातिवाद, बजट, धर्म का राजनीतिकरण, बच्चों की परवरिश, स्वास्थ्य, मजदूरों की स्थिति,सोशल मीडिया का दुरुपयोग आदि। और हमारी यह कोशिश रही कि हमारे पाठक समस्या नहीं बल्कि समाधान पर भी विचार करे।
आज के डिजिटल युग में एक नई और महिला उन्मुख पत्रिका का आरंभ ही अपने आप में एक चुनौती है लेकिन कहा जाता है ना कि सफलता उन्हें ही मिलती है जिन्होंने कभी संघर्षों के कदमों को स्पर्श किया हो।
हमारे लिए भी इस एक वर्ष में बहुत सी चुनौतियां रही लेकिन हमारा यह संघर्ष जारी रहेगा कि सही और नई सोच, दिशा और विचारों को लोगों बीच लाने की कोशिश करते रहेंगे।
समाज की घरेलू महिलाओं में स्वीकृति के साथ साथ ये बहुत खुशी की बात है कि आभा को समाज के पढ़े लिखे वर्ग में भी स्वीकृति मिली है और आभा रीडर्स क्लब के प्रोग्राम के जरिए हमें नई महिला लेखिका, डॉक्टर, वकील, अध्यापिका, प्रोफेसर, सोशल वर्कर्स से भी जुड़ने का मौका मिला जो आभा को दूसरों तक भी पहुंचाने का हमारे लिए माध्यम बनीं।
हम संकल्प करते है कि आगे इससे भी बेहतर अंक लाने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा। पाठकों की राय हमारे लिए अति महत्वपूर्ण है इसलिए आपके सुझाव, सपोर्ट, टिप्पणी और प्रतिक्रिया की हमें ज़रूरत है क्योंकि आगे का समय हमारे लिए अधिक सहज और जिम्मेदारियों का आह्वान लिए खड़ा है।
हमारे लेखकों का भी आभा के एक वर्ष पूर्ण करने में सफल योगदान रहा। नए नए विषय, विचारों में गहराई और संतुलन के साथ विचारों को पाठकों तक पहुंचाने में लेखकों ने हमारा साथ दिया। पाठकों और सहयोगियों ने भी अपनी प्रतिक्रिया और सक्रिय भागीदारी से इसको दूसरों तक पहुंचाने में मदद की।
आभा की ओर से हम आप सभी का आभार व्यक्त करते है जिनके बिना यह एक साल का सफर पूर्ण करना संभव नहीं था। यह वर्षगांठ उत्सव के साथ साथ एक नए और जिम्मेदारी भरे सफर का प्रारंभ है जहां विचारों के माध्यम से समाज का नवनिर्माण किया जाएगा।
खान शाहीन
संपादक