आयतुल्लाह ख़ामेनेई की शहादत पर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जताया शोक
28 फरवरी 2026 को इज़राइल और अमेरिका के संयुक्त रुप से किए गए टारगेटेड हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई शहीद हो गए। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैय्यद सआदतुल्लाह हुसैनी ने उनकी शहादत पर शोक व्यक्त करते हुए इस हमले की कड़ी निंदा की है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे सामने आकर इस हत्या पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोषियों के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाएं।
मीडिया को जारी एक बयान में जमाअत के अध्यक्ष ने कहा, "हम इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन पर गहरा दुख और संवेदना व्यक्त करते हैं। हम ईरान के लोगों के घोषित राष्ट्रीय शोक के समय के दौरान उनके साथ एकजुटता दिखाते हैं और दुखी परिजनों जिसमें उनकी बेटी और शहीद हुए दूसरे रिश्तेदार भी शामिल हैं के लिए धैर्य और धैर्य की दुआ करते हैं।"
सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा, "जिस तरह से अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या हुई हम उसकी कड़ी निंदा करते हैं। उनकी हत्या अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है, देश की संप्रभुता पर खुला हमला है, और जानबूझकर किया गया हमला है, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर और प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत साफ तौर पर निषिद्ध है, जिसके लिए अमेरिका और इज़राइल को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पूरी तरह से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। एक मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की बेरहमी से हत्या को सही ठहराने के लिए बहाने बनाकर अमेरिका और इज़राइल ने न सिर्फ़ युद्ध का एक गैर-कानूनी काम किया है बल्कि अपना दुष्ट स्वभाव भी दिखाया है। ऐसे देश जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों, मानव स्वाभाव और बुनियादी सभ्यतागत मूल्यों का सम्मान नहीं करते, उन्हें अलग-थलग कर देना चाहिए और उनके गैर-कानूनी हमले और अंतर्राष्ट्रीय कानून के बार-बार उल्लंघन के लिए सज़ा मिलनी चाहिए।"
जमाअत अध्यक्ष ने कहा, "हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हैं कि वे ईरान के खिलाफ और हमले पर विराम लगाने के लिए आगे आएं और इस भयानक तनाव के गंभीर नतीजों का सामना करें। उन्हें जवाबदेही तय करनी चाहिए और ईरान पर बिना उकसावे के हमला करने वालों को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के सामने उनके कामों के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए। इतने बड़े हमले को अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तहत सामान्य या नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद पुनः कहती है कि स्थायी शांति और स्थिरता तभी कायम हो सकती है जब देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाए और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में न्याय सुनिश्चित करने का दृढ़ता से पालन किया जाए।"
Headline: गुजरात आभा रीडर्स क्लब के वेबिनार का सफ़ल आयोजन
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अपने पाठकों की प्रतिक्रिया को जानने और आभा को मज़ीद बेहतर बनाने के लिए “आभा ई मैग्ज़ीन” की ओर से गुजरात में एक वेबिनार का आयोजन किया गया। जिसमें गुजरात की सोशल एक्टिविस्ट, अधिवक्ता, टीचर, डॉक्टर्स समेत विभिन्न सम्मानित महिलाओं ने भाग लिया, मैग्ज़ीन के लेखों पर टिप्पणी की और अपनी प्रतिक्रियाएं, अनुभव साझा किए साथ ही आभा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सहयोग देने का वादा किया।
इस मौके पर विभा जैन ने आभा के लेख ‘भौतिकवाद के शिंकजे में महिलाएं’ की समीक्षा करते हुए कई सुझाव पेश किए। डॉक्टर स्वालिहा मेमन ने लेख ‘पोस्टपार्टम डिप्रेशन : कारण और सुझाव’ की। एडवोकेट रतना वोहरा ने लेख ‘पन्नों में बसे अनुभूति के अनगिनत संसार’ की समीक्षा की।
पर्यावरणविद मुदिता वोहरा ने लेख ‘सोशल मीडिया के आवरण में विलुप्त होती सुधार की प्रवृत्ति’ पर टिप्पणी करते हुए सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान पर चर्चा की। इस मौके पर आभा ई मैग्ज़ीन की संपादक ख़ान शाहीन ने आभा के प्रकाशन के उद्देश्य बताए और प्रधान संपादक आरिफ़ा परवीन ने वेबिनार में शामिल हुए सभी अतिथियों का शुक्रिया अदा किया।