सफलता का रास्ता
article-image
इस्लाम दर्शन

सफलता का रास्ता


इस्लाम धर्म को लेकर समाज में तरह तरह की भ्रांतिया फैली हुई हैं और उसी में से एक भ्रांति यह भी है कि नेकी और दीन सिर्फ नमाज़ रोज़े तक सीमित है। हमने नमाज़ पढ़ ली, रोज़ा रख लिया, उसके बाद चाहे जो करते फिरें लेकिन हमारी पकड़ नहीं होगी। जबकि कुरआन हमें बताता है किः

नेकी (भलाई) यह नहीं है कि तुम अपने चेहरे पूरब या पश्चिम की तरफ फेर दो बल्कि नेकी यह है कि तुम ईमान लाओ अल्लाह पर और आख़िरत के दिन पर और फरिश्तों पर और किताबों पर और  नबियों पर,और अपना पसंदीदा माल ख़र्च करो रिश्तेदारों पर, यतीमो पर, मिस्कीनो पर, मुसाफ़िरों पर और सवाल करने वालों पर, और गर्दनें छुड़ाने में (कैद से आज़ाद कराने में) और नमाज़ क़ायम करो और ज़कात अदा करो, जो अहद करते हो उसे पूरा करो, सब्र करो तकलीफ पर, तंगी और मुसीबत पर और हक़ और बातिल की जंग के मौके पर, यही वह लोग हैं जो सच्चे हैं और यही मुत्तक़ी हैं।“ (सूरह बक़रा: 177)

इस आयत को "आयाते बिर्र" भी कहते हैं जो ईमानिआत, मामलात, इस्लाम के अहम अरकान और अख़्लक़ियात का बेहतरीन मजमुआ है ।

इस आयत में नेकी की परिभाषा बताई गई है। नेकी अर्थात भलाई यह नहीं है कि हम अपने चेहरे पूरब या पश्चिम की ओर कर ले बल्कि असल नेकी तो यह है कि हम अल्लाह पर ईमान लाएं उसकी ज़ात, सिफ़ात, कमालात के साथ, उसके पालनहार होने को, उसके शासक होने को दिल से स्वीकार करें और बदले के दिन यानी आख़िरत पर यक़ीन रखें की एक दिन इस दुनिया से चले जाना है और फिर हम दोबारा उठाए जाएंगे और हमें अपने कर्मों का पूरा हिसाब देना होगा।

नेकी यह है कि हम फरिश्तों पर ईमान लाएं कि फरिश्ते अल्लाह की बनाई हुई मख़लूक़ हैं और अल्लाह के हुकुम का पालन करते हैं। भलाई यह है कि हम ईमान लाएं अल्लाह की उतारी हुई किताबों पर जो पैगंबरों पर उतारी गईं।

नेकी यह है कि हम ईमान लाएं नबियों पर, जितने भी नबी दुनिया में आए आदम अलैहि सलाम से लेकर मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तक सब अल्लाह का संदेश लेकर आए और सब ने भलाई का रास्ता दिखाया और एक ईश्वर की बंदगी की दावत दी।

और नेक वह हैं जो अपना महबूब माल अल्लाह की मोहब्बत में ख़र्च करते हैं और अपने उन रिश्तेदारों पर जो ज़रूरतमंद है और उन बच्चों पर जो अभी बालिग़ नहीं हुए और उनके बाप का साया उनके सिरों से उठ गया। और ख़र्च करते हैं उन पर जो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाते लेकिन वह ज़रूरतमंद होते हैं। और मुसाफिरों पर अपना माल ख़र्च करते हैं जो अपने वतन से दूर परेशान हाल हो और वह उनकी भी ज़रूरत पूरी करते हैं जो उनसे सवाल करते हैं यानी उनके आगे हाथ फैलाते हैं, और उन बेकसूरों को आज़ाद कराने में जिनकी जिंदगी बिना किसी जुर्म के क़ैद में गुज़र रही है।

जो नमाज़ उसके पूरे अहकाम के साथ अदा करते हैं ग़फ़लत नहीं करते, जो अपने माल में से ज़कात अदा करते हैं। जब किसी से कोई वादा करते हैं तो उसे पूरा करते हैं उनके वादे झूठे नहीं होते। और जब कोई जिस्मानी तकलीफ पहुंचती है या मुसीबत आ पड़ती है तो सब्र करते हैं अल्लाह पर भरोसा करते हैं, जो सच और झूठ की लड़ाई में मज़बूती से सच के साथ जमे रहते हैं। ऐसे ही लोगों को अल्लाह ने सच्चा कहा और ऐसे ही लोग अल्लाह से डरने वाले हैं।


 रफिया सुल्तान 

भोपाल, मध्य प्रदेश

हालिया अपलोड

img
अपडेट
“मुस्लिम महिलाओं की विलुप्त हुई विरासत...

नई दिल्ली में आयोजित “हिस्ट्री कांफ्रेंस” के एक सत्र ‘इतिहास में महिलाओं...

img
अपडेट
भारत में गर्मी का मौसम और...

भारत की भौगोलिक विविधता जहां इसे प्राकृतिक सुंदरता से भर देता हे...

img
अपडेट
“इतिहास लगातार रिसर्च और इंटरप्रिटेशन का...

(11-12 अप्रैल को नई दिल्ली में आयोजित हुई “नेशनल हिस्ट्री कांफ्रेंस” में...

img
अपडेट
एक नया कानून, एक पुरानी पॉलिसी

30 मार्च 2026 को इज़रायल की संसद नेसेट ने एक विवादस्पद कानून...

Editorial Board

Arfa ParveenEditor-in-Chief

Khan ShaheenEditor

Sahifa KhanAssociate Editor

Members