रमज़ान में इस तरह रखें खुद को स्वस्थ्य
यह तो हम सभी जानते हैं कि रमज़ान केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह ईमान, संयम, आत्मशुद्धि और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने की ट्रेनिंग का महीना है। इसलिए मुस्लिम महिलाओं के लिए रमज़ान विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वे न केवल इबादत करती हैं, बल्कि परिवार, बच्चे और घर की ज़िम्मेदारियाँ भी निभाती हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि वे रोज़े के साथ-साथ अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें और सब चीज़ों के बीच संतुलन बनाकर चलें। क्योंकि इस्लाम एक प्राकृतिक मार्गदर्शन है, जो व्यक्ति के संयम और उसकी सीमाओं को समझता है। क़ुरआन हमें यह बताता है कि अल्लाह ने किसी पर उसकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डाला।
﴾لَا يُكَلِّفُ اللَّهُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا﴿
“अल्लाह किसी जान पर उसकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डालता।”
(सूरह अल-बक़रह 2:286)
ईमान: रोज़े की रूह
रोज़ा सबसे पहले ईमान का अमल है। रोज़ा हमें सब्र, शुक्र और आत्मसंयम सिखाता है। क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है:
﴿يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُتِبَ عَلَيْكُمُ الصِّيَامُ﴾
“ऐ ईमान वालों! तुम पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए हैं।”
(सूरह अल-बक़रह 2:183)
महिलाओं के लिए यह समझना ज़रूरी है कि रोज़ा केवल भूख सहना नहीं, बल्कि दिल, दिमाग़ और नीयत को पाक करना है। अगर कोई महिला बीमारी, गर्भावस्था, स्तनपान या अत्यधिक कमजोरी की स्थिति में है, तो इस्लाम उसे रुख़्सत (छूट) भी देता है।
रोज़ा और महिलाओं का स्वास्थ्य
महिलाओं का शरीर हार्मोनल बदलावों से गुजरता है। माहवारी, गर्भावस्था, स्तनपान और दवाइयों की ज़रूरत—ये सभी स्थितियाँ चिकित्सीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए रमज़ान से पहले स्वयं का मेडिकल परीक्षण कराना अत्यंत आवश्यक है।
मासिक धर्म (Menstruation)
माहवारी के दौरान रोज़ा और नमाज़ माफ़ है। यह कोई कमी नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत है। इस दौरान महिलाओं को चाहिए कि वह अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दे, आयरन-युक्त भोजन ले और कमजोरी से बचे।
﴿يُرِيدُ اللَّهُ بِكُمُ الْيُسْرَ وَلَا يُرِيدُ بِكُمُ الْعُسْرَ﴾
“अल्लाह तुम्हारे लिए आसानी चाहता है, कठिनाई नहीं।”
(सूरह अल-बक़रह 2:185)
गर्भावस्था और स्तनपान
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर रोज़ा माँ या बच्चे के लिए नुकसानदेह हो तो रोज़ा रमज़ान के बाद किसी महीने में रख कर पूरा किया जा सकता है। इस्लाम में माँ और बच्चे की सेहत को प्राथमिकता दी गई है। इसलिए गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को चाहिए कि पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
गृहस्थ जीवन: सम्मान और संतुलन
इस्लाम ने महिलाओं को इज़्ज़त, सम्मान और गरिमा दी है। रमज़ान में महिला की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है—वह इबादत भी करती है और पूरे घर के लिए सहरी-इफ़्तार की व्यवस्था भी। लेकिन यह ज़रूरी है कि महिलाएँ खुद को पूरी तरह थका न दें। ज़रूरत से ज़्यादा काम, नींद की कमी और पानी न पीना स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।
﴿وَلَا تُلْقُوا بِأَيْدِيكُمْ إِلَى التَّهْلُكَةِ﴾
“अपने आप को अपने ही हाथों हलाकत में न डालो।”
(सूरह अल-बक़रह 2:195)
दवाइयाँ और रोज़ा
जो महिलाएँ नियमित दवाइयाँ लेती हैं, उन्हें रमज़ान से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। कई दवाओं का समय सहरी और इफ़्तार के अनुसार बदला जा सकता है।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा छोड़ना या मात्रा बदलना नुकसानदेह हो सकता है। याद रखें—सेहत एक अमानत है।
सहरी और इफ़्तार: संतुलित आहार
सहरी छोड़ना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सहरी में प्रोटीन, फाइबर और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल होना चाहिए। इफ़्तार में ज़्यादा तला-भुना और मीठा खाने से परहेज़ करें। यह पेट, हार्मोन और वजन पर बुरा असर डालता है।
﴿وَكُلُوا وَاشْرَبُوا وَلَا تُسْرِفُوا﴾
“खाओ, पियो लेकिन फ़िज़ूलखर्ची न करो।”
(सूरह अल-आराफ़ 7:31)
मानसिक स्वास्थ्य और इबादत
रमज़ान में मानसिक सुकून बहुत ज़रूरी है। ज़िक्र, दुआ और क़ुरआन की तिलावत दिल को सुकून देती है। महिलाओं को चाहिए कि वे अपने लिए भी समय निकालें।
निष्कर्ष
ईमान, रोज़ा और गृहस्थ जीवन ये तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रमज़ान हमें यह सिखाता है कि इबादत और सेहत के बीच संतुलन कैसे रखा जाए। इस्लाम महिलाओं से यह नहीं चाहता कि वह अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ करें, बल्कि यह चाहता है कि वह समझदारी, संतुलन और ईमान के साथ रमज़ान गुज़ारे। रोज़ा तभी खूबसूरत है, जब उसमें नियत की पाकी, सेहत की हिफ़ाज़त और अल्लाह पर भरोसा शामिल हो।
सीमा कौसर
वारंगल, तेलंगाना