क्या आप रमज़ान के लिए तैयार हैं?
मेहमान जितना ख़ास होता है उसके आने की तैयारी भी उतनी ज़बरदस्त होती है। एक चीज़ जिसके तरफ हम सबको अभी से तैयार और सक्रिय हो जाना चाहिए वो है रमज़ान के आने से पहले उसकी तैयारी। जिस तरह हम अपने किसी भी महत्वपूर्ण काम से पहले आवश्यक रुप से उसकी तैयारी करते हैं।
हम परीक्षा से पहले उसकी तैयारी करते हैं, ठीक वैसे ही इबादत में भी यही सिद्धांत लागू होता है। तैयारी में दो चीज़ें होती हैं- एक मानसिक तैयारी और दूसरी व्यावहारिक तैयारी। हमें अल्लाह की प्रसन्नता हासिल करने के लिए सबसे पहले अपने इरादों को ठोस और दृढ़ कर लेना चाहिए। हमें उन इरादों को रमज़ान की तैयारी में शामिल करना चाहिए। जैसे कि मैं इस रमज़ान अपनी नमाज़ों को उचित समय पर खुशु और खुज़ु (ध्यानपूर्वक) अदा करूंगी या ज्यादा नवाफिल अदा करूंगी, या फजिर की नमाज़ को तवील (लंबी) करूंगी या क़ुरान को तर्जुमा के साथ मुकम्मल करूंगी।
अबू हुरैरा(र.अ) से रवायत है कि पैगंबर मोहम्मद ﷺ ने फरमाया- "अल्लाह तुम्हारे चेहरों और माल को नहीं देखता बल्कि वह तुम्हारे दिल और आमालों को देखता है"(सही मुस्लिम)
आने वाला महीने में अल्लाह को ख़ुश करने का, उसकी नाराज़गी को दूर करने का, अपने गुनाहों की बख्शिश का और हमारी जिंदगी को और बेहतर बनाने का एक बेहतरीन मौका हमें मिल रहा है हम पर मेहरबानी की जा रही है लिहाज़ा हमें चाहिए कि हम पुरजोश अंदाज़ से इसकी तैयारी करें और नेक कामों और इबादतों के लिए समय प्रबंधन करें, क्योंकि हम एक ऐसे महीने में प्रवेश करने जा रहे हैं जिसमें इनाम बहुत ज़्यादा हैं। माहे रमज़ान की एक महीने की ट्रेनिंग हमें 11 महीने फायदा पहुंचा सकती है, हमारी शख्सियत का ज़ाहिरी और रूहानी इरतिक़ा (आध्यात्मिक विकास) कर सकती है जिस मौके को एक ज़ी- शऊर (जागरूक) मुसलमान हरगिज़ गंवा नहीं सकता।
रमज़ान उल मुबारक की आमद से पहले हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ कर लें। हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास (र.अ) से जब पूछा गया कि आप रमज़ान की तैयारी कैसे करते हैं तो आपने फ़रमाया कि "अपने दिलों को साफ करके"। क्योंकि दिलों में बुग़्ज़ और कीना रखकर हम इबादत के किसी दर्जे को नहीं पहुंच सकते और ना ही अल्लाह से अपने ताल्लुक़ को मज़बूत कर सकते हैं।
यह कैसे मुमकिन है कि हम नमाज़ भी पढ़ रहे हैं, क़ुरान भी पढ़ रहे हैं तस्बीह भी कर रहे हैं सदक़ा ख़ैरात भी कर रहे हैं, इल्म भी बढ़ा रहे हैं तकरीरें भी सुन रहे हैं लेकिन तमाम इबादत करके भी दिल नापाक और नफसीयत ज्युं की त्यों है,उस पर कोई असर नहीं हो रहा तो यह हमारी बदक़िस्मती भी है और बद-नियति भी।
इरादों को पक्का करें:-
रमज़ान माफ़ी, रूहानी ताज़गी और सुधार का महीना है। रमज़ान में ईमानदारी और रूहानी इरतिक़ा (आध्यात्मिक विकास) की यक़ीनी ख्वाहिश के साथ आगे बढ़ें। याद रखें कि इस पाक महीने में आपके काम के पीछे आपके इरादे ही असली ताकत होते हैं। अपनी रूहानियत पर गौर ओ फ़िक्र (विचार) करें और इस रमज़ान में इसे बेहतर बनाने का इरादा करें।
आप अल्लाह की माफ़ी कैसे हासिल करेंगे?
आप उसके साथ अपना रिश्ता कैसे मज़बूत करेंगे?
आप अपने किरदार को कैसे बेहतर बनाएंगे?
सही हदफ(लक्ष्य) तय करें:-
सच्चे इरादे ज़रूरी हैं लेकिन वे आपको आपके हदफ (लक्ष्यों) तक पहुँचाने के लिए काफी नहीं हैं। अपने मौजूदा रवैयों (व्यवहार) पर ग़ौर करें और पहचानें कि आप कौन सी आदतें अपनाना चाहते हैं या छोड़ना चाहते हैं। महीने के हदफ तय करें, उन्हें हफ़्ते के मानकों और रोज़ाना के कामों में बाँट लें। रमज़ान से पहले अपने ज़रूरी एहदाफ़ (लक्ष्य) तय कर लेना इस बात को यक़ीनी (सुनिश्चित) बनाता है कि आप अपनी इबादतों के साथ-साथ अपनी दूसरी ज़िम्मेदारियों को भी पूरा कर सकते हैं।
ऐसे गोल्स (लक्ष्य) तय करने से आप परेशान नहीं होते और पूरे महीने आपका हौंसला बुलंद रहता है। आप एक बार में सब कुछ नहीं कर सकते। अपने गोल्स को रियलिस्टिक (हक़ीक़त पसंद) बनाएं। अपनी कोशिशों में रेगुलर रहें आपको फ़र्क नज़र आएगा। सबसे अच्छे काम वो होते हैं जो रेगुलर किए जाते हैं, भले ही वो छोटे क्यों ना हो।
रमज़ान का महीना इसलिए बा-बरकत है कि इसमें क़ुरान नाज़िल हुआ, जो हमारी जिंदगी गुज़ारनें का तरीका है। क्या शाबान कि महीने में हम इस बात को महत्व देते हैं की हम क़ुरान को कितना समय दे रहे हैं? क्या हम रमज़ान से पहले क़ुरान का एक राउंड मुकम्मल कर रहे हैं ताकि हमारा पहले से ही इससे ठोस संबंध बन जाए?
हम क़ुरान के साथ संबंध कैसे स्थापित करें?
उसकी तिलावत करें
उसे तर्जुमे (ट्रांसलेशन) के साथ पढ़ें
उसको याद करें
उसकी आयात पर ग़ौर ओ फ़िक्र (विचार विमर्श) करें
उसके अनुसार स्वयं को ढालने का प्रयास करें
उसके आदेश और क़ानून साज़ी (विधान/लेजिसलेशन) को स्थापित करने का प्रयास करें।
हर दिन क़ुरान पढ़ने, ज़िक्र (अल्लाह को याद करने), सुन्नते अदा करने, कसरत से दुआएं मांगने, गरीबों में खाना बांटने, राशन किट्स तैयार करने, क़यामुल लैल (रात की नमाजें) या चैरिटी के कामों के लिए एक ख़ास समय तय करें। इसकी प्री प्लानिंग करने से आप इन सभी कामों को अंजाम दे सकेंगे।
रमज़ान में लगातार इबादत और नेक कामों में व्यस्त रहना हमारी नेकियों में इज़ाफ़ा करता है और हमें गुनाहों से पाक कर देता है, नेक लोग तहज्जुद के समय सहरी से पहले ख़ुद को तैयार करते हैं, असतग़फार (क्षमा) के लिए ताकि उनके गुनाहों की बख्शिश हो जाए। इबादत में बाकायदगी (नियमित रूप) से शामिल होने से अल्लाह के साथ हमारा ताल्लुक़ (रिश्ता) मज़बूत होता है और नज़्म ओ ज़ब्त (अनुशासन) का एहसास पैदा होता है।
ताल्लुक़ बिल्लाह (अल्लाह से संबंध) के बिना उम्मत से हमारा संबंध मज़बूत हो ही नहीं सकता जिसकी हमसे अपेक्षा की गई है और जिसके बिना हम एक अच्छे मुसलमान नहीं बन सकते हैं।
अपने बच्चों को शामिल करें:-
ऊपर बताए गए तरीकों को उनके साथ अपनाकर अपने बच्चों में रमज़ान की अहमियत का एहसास (भावना) पैदा करें। उन्हें रोज़ा, नमाज़, सदक़ा ख़ैरात और अन्य इबादतों के लिए मोटिवेट करें। अपने इरादों को पक्का करने, सही हदफ (लक्ष्य) तय करने और उन कामों को करने के लिए उनकी हिम्मत अफज़ाई (प्रोत्साहित) करें।
घर के कामों को आसान बनाएं:-
रूहानी सरगर्मियों (आध्यात्मिक कामों) के लिए समय निकालने के लिए घर के कामों और खाने की तैयारियों को आसान बनाएं। सहरी और इफ्तार की तैयारी के लिए पहले से ही उपलब्ध खाने को प्राथमिकता दें। जिम्मेदारियों को बांटने और तेज़ी से टीम वर्क के लिए परिवार के सदस्यों के बीच घर के कामों को बांटें। इसकी तैयारी के तौर पर, हमें रमज़ान के दौरान कुछ समय निकालने के लिए कुछ चीजें करनी चाहिए ताकि ज़्यादा इबादत के लिए समय निकाला जा सके।
ये चीजें करने की कोशिश करें-
• सफाई और पुताई के काम रमज़ान से पहले पूरे कर लिए जाएं।
* लॉन की घास काट लें ताकि ईद के बाद तक कुछ न करना पड़े।
* ऐसी चीज़ों का स्टॉक कर लें जिनकी शेल्फ लाइफ लंबी हो ताकि रमज़ान के दौरान आपको सिर्फ़ कम समय तक चलने वाली और इमरजेंसी की चीज़ें ही ख़रीदनी पड़ें।
* अपनी सोशल मुलाक़ातें पूरी कर लें।
• रमज़ान शुरू होने से पहले परिवार और दोस्तों के लिए ईद के तोहफ़े और कपड़े ख़रीद लें ताकि रोज़े की हालत में आपका क़ीमती समय बाज़ारों में बर्बाद ना हो।
• रमज़ान शुरू होने से पहले ग़ैर-ज़रूरी अपॉइंटमेंट पूरे कर लें, जैसे डेंटिस्ट, आंखों के डॉक्टर इत्यादि।
* घर की बड़ी सफ़ाई अभी पूरी कर लें, ताकि रमज़ान के दौरान आपको इसे बनाए रखने के लिए थोड़ा ही समय देना पड़े।
* मुश्किल कामों को अभी पूरा करने की कोशिश करें और आसान कामों को रमज़ान के लिए छोड़ दें।
* स्टूडेंट्स अपने मुश्किल सब्जेक्ट्स का एक बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार कर लें ताकि रमज़ानो में इबादत का समय मिल सके।
रमज़ान हमारे दरजात की बुलंदी का कारण बनते हैं और अल्लाह ताला से निकटता प्रदान करते हैं। रमज़ान का महीना बहुत क़ीमती है। यह हम में से कुछ लोगों के लिए आख़िरी भी हो सकता है, ठीक वैसे ही जैसे हमारे कुछ परिवार के लोग और दोस्त इस साल हमारे साथ नहीं हैं, जिन्होंने पिछले साल हमारे साथ रोज़े रखे थे। पैगंबर मोहम्मद ﷺ ने शाबान के महीने में यह दुआ की-
اَللّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِى رَجَبَ وَ شَعْبَانَ وَ بَلِّغْنَا رَمَضَان
"ऐ अल्लाह! हमें रजब और शाबान में बरकत अता फरमा और हमें रमज़ान तक पहुंचा दे" (मिश्कात)
अल्लाह तआला हम सबको माहे रमज़ान की बरकतें नसीब फरमाए, आमीन
रज़िया मसूद
भोपाल, मध्य प्रदेश