नशा हमारे समाज को ख़ोखला कर रहा है
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संपादकीय

नशा हमारे समाज को ख़ोखला कर रहा है

भारत में बहुत सारे अपराध है जिनको एक आम भारतीय निडर होकर खुलेआम करता है। उसी में से एक नशा करना है जो समाज में निर्लज्जता, बेशर्मी और बुराइयों को जन्म देता है और आश्चर्य की बात ये है कि इनमें सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि अधेड़ उम्र के लोग और बच्चे भी शामिल है जो इस नशे की लत में गिरफ्तार हैं। 

कारण स्पष्ट है और वह यह है कि आज की युवा पीढ़ी बच्चों की सही परवरिश न करने के नतीजे में ये सब भोग रही है। 2022 के एक सर्वेक्षण के अनुसार देश में 10 से 17 साल की उम्र के 1.50 करोड़ बच्चे ड्रग्स लेने के आदी हो चुके है और कम से कम 16 करोड़ भारतीय शराब का नशा करते है जो नशा करने वालों में सबसे बड़ी संख्या है। 

हर साल 02 अक्टूबर को राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया जाता है और इसके अलावा भी कई NGO's को तरफ से भी ऐसे अभियान चलते रहते है लेकिन इसके बाद भी नशा करने वालों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। नशे के खिलाफ एक जन जागरण अभियान के दौरान सर्वे में पाया गया कि 12 से 17 आयु वर्ग के सर्वाधिक 67% बच्चे नशे की चपेट में आ रहे है।

संसद में मंत्री वीरेंद्र कुमार ने एक सवाल के जवाब में बताया कि मादक पदार्थों के परिणाम पर 2019 में सर्वे किया गया था जिसके अनुसार दिल्ली में 10 से 17 साल के 4,93,600 बच्चे अलग अलग प्रकार की दवाओं और नशे के आदि पाए गए।

नशा हमारे समाज में इतना आम हो चुका है कि अब हर कोई इसे गलत नहीं समझता जबकि यही नशे में धुत लोग अपराध करते है और सबसे ज़्यादा महिलाएं इसका शिकार होती है और बलात्कार की घटनाएं हम आए दिन देखते सुनते रहते है। घरेलू हिंसा जैसे मामले भी कई बार नशे की हालत में ज़्यादा बढ़ते है। 

इंसान जब नशे (शराब) की हालत में होता है तब वो हर अच्छे बुरे की तमीज़ भूल जाता है और लोगो को गालियां देने में भी नहीं शर्माता ना मारपीट करने में उसके शर्म आती है। एक संयुक्त अध्ययन में पाया गया कि 23% यातायात दुर्घटनाएं नशे में धुत होने के कारण होती हैं। 

हज़रत मोहम्मद () ने फरमाया कि : "तुम शराब हरगिज़ मत पियो, इसलिए कि शराब सारी बुराइयों की जड़ है"।

लोग ये कहकर सहारा लेते है कि कोई मानसिक तनाव या किसी दर्दनाक घटना के बाद वो नशा करने लगे है जिससे उन्हें सुकून मिलता है लेकिन सोचिए क्या ये नशा जो इंसान को अंदर से खोखला कर देता है वो कुछ समय के लिए उसके दुःख को दूर करने के लिए सही होगा?

भाग दौड़ भरी जिंदगी में इंसान अगर सुकून चाहता है तो नशे के अलावा उसके पास ऐसे अनगिनत विकल्प है जो उसके जीवन के लिए लाभदायक हो सकते है। 

अगर वो अपने पैदा करने वाले ईश्वर से प्रार्थना करे और उसके बताए नियम और कानून के अनुसार जीवनयापन हो तो वह एक सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है क्योंकि ईश्वर का भय ही वो सर्व - उपचार है जो इंसान को कुकर्म और बुराइयों से रोक सकता है। अन्यथा बुराई करने के हजारों रास्ते खुले है इंसान जिस राह पर चले वही उसके लिए आसान हो जाती है। 

अभिभावकों को भी चाहिए कि अपने बच्चों की गतिविधियों और उसके साथ रहने वाले दोस्तो पर नज़र रखे और सुनिश्चित करे कि वे बुरी संगत में नहीं है। कुछ प्रतिबंध लगाए और उनके पीछे के तर्क अपने बच्चों को समझाए ताकि बच्चा उसके कैद ना समझे । 

अपने बच्चों के दोस्त बने और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करें। बच्चों को अभिभावक जितना सहारा और सुरक्षा दे सकते है उतना उन्हें कोई नहीं दे सकता इसलिए उनसे भावनात्मक रूप से जुड़े और गलत संगत और गलत कामों से उन्हें दूर रखने की कोशिश करे। 

कुछ प्रयास सरकार की तरफ से भी किए जाने चाहिए जिससे नशा करने वालों की संख्या में कमी देख सके। सरकार को खुलेआम शराब और मादक पदार्थों की बिक्री पर रोक लगानी चाहिए और शराब पी कर अपराध करने वालों पर कड़ी सज़ा रखना होगी तभी कुछ हद्द तक इस समस्या का समाधान हो सकता है।


ख़ान शाहीन

संपादक

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