बच्चों के सपने
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बाल दिवस विशेष

बच्चों के सपने


बाल रचना (कविता)



बचपन की हँसी जन्नत का नूर है,

बच्चों के बिना हर खुशी अधूरी है।

इनकी आँखों में सपने सजाए रखना,

इनके चेहरे पर मुस्कान बनाए रखना।


कोई छोटा, कोई बड़ा नहीं होता,

कोई बच्चा किसी से कम नही होता।

मौका मिले तो सितारे बन जाएँ,

प्यार मिले तो फूलों-से खिल जाएँ।


छोटी-सी उम्र, बड़े-बड़े अरमान,

आँखों में सपने, दिल में उड़ान।

इनके सपनों को टूटने न देना,

बचपन को कभी रूठने न देना।


हम बच्चे हैं, हमें मुस्कुराने दो,

अपने सपनों के पंख फैलाने दो।

मत छीनो हमसे बचपन की बहार,

हमें भी चाहिए थोड़ा-सा प्यार।‌


हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिले,

हर चेहरे को खुशियों का संसार मिले।

न कोई बच्चा मजबूरी में बचपन खोए,

न कोई मासूम भूखा सोए।


हम कल की उम्मीद, आज की पहचान हैं,

हम छोटे सही, मगर देश की शान हैं।

हमारी हँसी से हर आँगन खिलता है,

बच्चों से ही तो दुनिया का कल सँवरता है।


नन्हे कदमों से नई राह बनाएँगे,

अपनी मेहनत से सपने सजाएँगे।

आज बच्चे हैं, कल देश चलाएँगे,

प्यार और शिक्षा से दुनिया महकाएँगे।


बचपन बचाओ, खुशियाँ सजाओ,

हर बच्चे को गले लगाओ।

बच्चों की हँसी से दुनिया मुस्कुराए,

हर दिन बाल दिवस बन जाए!


आफिया सिद्दीका

कक्षा 7, पुसद, महाराष्ट्र 

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