अल्लाह से मुहब्बत
अल्लाह तआला बड़े रहमान व रहीम हैं। अपने बंदों से बेहद मुहब्बत रखते हैं। हमारे लिए तरह तरह की नेमतें भेजीं। हमेशा रहमतों की बारिश होती रहती है। पैदा होते ही हमारे लिए मां की छातियों से दूध की नहर जारी की। सबके दिलों में हमारे लिए मुहब्बत डाली। हमारे मां-बाप को इतनी ताकत दी कि वे दुख झेलकर हमें पालें और बड़ा करें। जब अल्लाह तआला हम से इतनी ज़्यादा मुहब्बत करते हैं तो हम भी क्यों ना उनसे जी जान से मुहब्बत करें। इसीलिए तो नेक बेटियां सबसे बढ़ चढ़कर अल्लाह से मुहब्बत रखती हैं और कभी ऐसा काम नहीं करतीं, जिस से अल्लाह तआला नाराज़ हों।
बहुत दिनों की बात है, अल्लाह की एक नेक बंदी थीं बीबी मरयम अलै०। वह हज़रत ईसा अलै० की अम्मी जान थीं। बीबी मरयम अलै० के मां-बाप ने बेटी को अल्लाह की राह में दे दिया था। वह अपनी बस्ती की सबसे बड़ी मस्जिद में रहती थीं।
बचपन ही से उनको अल्लाह से बेहद मुहब्बत थी। हर समय उनका दिल अल्लाह तआला की तरफ़ लगा रहता था। वह अकेले में अल्लाह को याद करती या नमाज़ पढ़ती रहती थीं। अल्लाह ने उनकी इस दिली मुहब्बत को कुबूल कर लिया। उनको हर बुराई से बचाकर रखा। हज़रत ईसा अलै० जैसा बेटा दिया जो बहुत ही मशहूर नबी गुज़रे हैं। बीबी मरयम अलै० को अल्लाह ने अपनी मुहब्बत के बदले इतना बड़ा दरजा दिया कि वह पिछली सारी उम्मतों में सबसे बेहतर औरत मानी जाती हैं।
हज़रत मरयम अलै० के अलावा भी अल्लाह की अनगिनत बंदियां ऐसी गुज़री हैं जो अल्लाह से बेहद मुहब्बत रखती थीं। इसी तरह की एक नेक बंदी बीबी राबिया रह० थीं। वह बसरा की रहने वाली थीं। रात भर अल्लाह तआला को याद करती थीं। एक बार रात भर इबादत में गुज़ार दी। सुबह के समय किसी ने कहा कि ऐसे मेहरबान अल्लाह तआला का हम कैसे शुक्रिया अदा करें, जिसने हमें रात भर इबादत का मौका दिया। उन्होंने कहा: “मैंने इसीलिए आज दिन का रोज़ा रखा है।”
हज़रत राबिया रह० जब अल्लाह की याद में लग जातीं तो चाहे कोई आ जाए, उसकी तरफ़ ध्यान नहीं देतीं। उनको अल्लाह पर बेहद भरोसा था। एक बार वह बीमार पड़ीं। एक व्यक्ति बहुत सारा रुपया लाया और उन्हें देना चाहा। उन्होंने इंकार कर दिया। उसने हसन नाम के एक बुज़र्ग से सिफ़ारिश करवाई कि वह पैसा ले लें। लेकिन राबिया बसरी ने कहा:
“ऐ हसन! जो अल्लाह अपने दुश्मनों को भी रोज़ी देता है, क्या वह मुहब्बत करने वालों को रोज़ी ना देगा? मैं यह माल क्यों लूं? ना जाने हलाल है या हराम।”