प्रयास करने वाले असफ़ल नहीं होते
दोस्तों! मैं आपका भाई हिसाम मुहम्मद अल अताअ हूं। मेरा घर फ़िलीस्तीन में है। आप तो मेरे शहर से भलि भांति परिचित होंगे, हैं ना? जहां मैं और मुझ जैसे सैकड़ों बच्चे प्रतिदिन शहीद हो जाते हैं। यहां लाशों के ढेर हैं, ज़मीनें खून से लथपथ हैं और चीख पुकार इतनी कि क़यामत जैसा प्रतीत होता है। हम किसी भी पल में शहीद कर दिए जाते हैं, हमें बिना किसी कारण गोली मार दी जाती है। हमारे पास घर है ना घर वाले। आपको पता है मेरा घर गज़ा में था लेकिन वहां भी बमबारी हुई तो मुझे अपने रिश्तेदारों के साथ रिफ़ाह के कैंपों में भेज दिया गया। मेरी तरह मेरे कुछ दोस्त भी रोते हुए मुझ से आ मिले और बाकी कुछ दोस्त तो जन्नत के सफ़र पर निकल गए। मेरे प्रियजनों की तरह यहां आकर मुझे पता चला कि यहां तो बिजली ही नहीं है।
पानी है ना ख़ाना, हर कोई दर दर भटक रहा है। मेरे बड़े भाई के दो नन्हें मुन्ने प्यारे से जुड़वां बच्चे हैं, बिजली नहीं होने के कारण बहुत अंधेरा रहता है तो वे दोनों बहुत डर जाते हैं और रोने लगते हैं। मुझे एक उपाय सूझा और मेरे इसी उपाय ने मुझे मेरे दुख से निकाल दिया। मेरे घरवालों से बिछड़ कर अकेला रह जाने का दुख मुझे नहीं भूला और ना ही कभी भुलाया जा सकता है, लेकिन यही चीज़ मेरी ताकत बन गई।
मैंने सोचा कि मैं अपने छोटे छोटे भाई बहनों और उन सारे लोगों की मदद करूंगा जो मेरी तरह बल्कि मुझसे ज़्यादा दुखी हैं और मेरे कैंप में रह रहे हैं। आपको पता है मैं आपकी तरह स्कूल नहीं जा सकता, ना पढ़ाई कर सकता हूं, लेकिन मुझे नई चीज़ें सीखने और करने में बहुत दिलचस्पी है। इसलिए मैंने बहुत प्रयास के बाद छोटे-छोटे पंखे ढूंढ लिए। मैं उन्हें कैंप में ले आया और सोचा कि अब मैं इससे पवन चक्की बना लूंगा। आपको पता है ना कि पवन चक्की किस काम आती है? सही सोचा! यह बिजली पैदा करती है।
बहुत बड़ा ना सही लेकिन यह मेरा छोटा सा प्रयास था। मेरा पहला प्रयास नाकाम रहा और दूसरे ने बिजली उत्पन्न कर दी लेकिन वह बहुत कमज़ोर थी। पर हार नहीं मानते ना? आप ही लोग कहते हैं ना कि कभी हिम्मत नहीं हारते और प्रयास जारी रखना चाहिए। इसलिए मैंने एक और पंखा लिया और पूरी आशा के साथ इस काम में जुट गया। अंततः मैं सफ़ल रहा। मैंने हवा से चलने वाले पंखों से बिजली बना दी। अब हमें रात में डर नहीं लगता, मेरे छोटे छोटे बहन भाई जो रात में अंधेरे में डर जाते थे, अब जब वे आंख खोलते हैं तो उजाला होता है, इसलिए वे डरते नहीं है।
जब जब हवा चलती है तो हमारा कैंप जगमगा जाता है। मैं बहुत खुश हूं कि आप लोगों ने अपने इस भाई को इतनी दुआ दी और मेरे इस प्रयास को इतना पसंद किया। मुझे बहुत अच्छा लगता है जब आप मुझे “फ़िलीस्तीन का न्यूटन” कह कर बुलाते हैं। लेकिन एक बात बताऊं, न्यूटन के सिर पर सेब गिरा और उसने गुरुत्वाकर्षण की खोज कर डाली, लेकिन हमारे यहां इतने लोग शहीद हो गए और यह सिलसिला जारी है लेकिन किसी ने इंसानियत की खोज नहीं की।
मैं उसी सफ़र पर हूं और पूरी दुनिया को बताना चाहता हूं। आप लोग ज़रुर दुआ करना कि यह युद्ध थम जाए और मैं भी आपकी तरह स्कूल जाऊं और पढ़ाई करूं। मैं प्रयास करुंगा कि मैं भी एक दिन न्यूटन जैसा वैज्ञानिक बनूं और एक ऐसा अविष्कार करूं जिससे ना केवल फ़िलीस्तीन की जनता बल्कि आप सभी को फायदा पहुंचे और हां मैंने तो बहुत छोटा सा प्रयास किया लेकिन “प्रयास करने वालों की हार नहीं होती” और जब हम अच्छी नीयत के साथ प्रयास करते हैं तो अल्लाह भी हमारी मदद करता है। इसलिए आप लोग भी कुछ बड़ा करने का प्रयास अवश्य करना।
इंशा अब्दुल गफ़्फ़ार