हक़ीम लुक़मान की नसीहत
बच्चों! हक़ीम लुक़मान को तो आप लोग जानते ही होंगे। अल्लाह तआला को उनसे इतनी मुहब्बत थी कि उनका ज़िक्र क़ुरआन मजीद में आया है। अल्लाह तआला उनके बारे में सूरह लुक़मान आयत नंबर 12 में फ़रमाते हैं: “और हमने यक़ीनन लुक़मान को हिक़मत दी थी कि तू अल्लाह का शुक्र कर। हर शुक्र करने वाला अपने ही फ़ायदे के लिए शुक्र करता है।”
इसके आगे सूरह लुक़मान आयत नंबर 13 से 19 के बीच उन नसीहत का ज़िक्र किया है जो हकीम लुक़मान ने अपने बेटे को की थी। और यह दुनिया की सबसे शानदार नसीहतें हैं। अगर कोई इन नसीहतों पर चले तो वह यक़ीनन दुनिया और आख़िरत हर जगह सफ़ल होगा।
सबसे पहली नसीहत - शिर्क से बचना "ऐ मेरे प्यारे बेटे! अल्लाह के साथ किसी को शरीक न ठहराना, बेशक शिर्क बहुत बड़ा ज़ुल्म है।" (31: 13)
माता-पिता के साथ अच्छा बर्ताव (हुस्ने सुलूक) अल्लाह फरमाता है: "और हमने इंसान को उसके माँ-बाप के बारे में नसीहत की है... और अगर वो दोनों तुझ पर ज़ोर डालें कि तू मेरे साथ शिर्क करे तो उनकी बात न मान, लेकिन दुनिया में उनके साथ अच्छी तरह पेश आ।" (31:14-15)
अल्लाह हर चीज़ देख रहा है "प्यारे बेटे! अगर कोई चीज़ राई के दाने के बराबर भी हो, फिर वो किसी चट्टान में हो या आसमानों में या ज़मीन में, अल्लाह उसे ले आएगा। बेशक अल्लाह बारीक बीन और बाखबर है।" (31:16)
दीन की बुनियादें "ऐ मेरे प्यारे बेटे! नमाज़ क़ायम रखना, अच्छे कामों की नसीहत और बुरे कामों से मना करते रहना, और जो मुसीबत तुम पर आए उस पर सब्र करना। बेशक ये बड़े हिम्मत के कामों में से है।" (31:17)
अख़लाक़ और मुआशरत "और लोगों से मुंह फ़ेर कर बात ना कर, ना ज़मीन में अकड़ कर चल। बेशक अल्लाह किसी तकब्बुर करने वाले, शेखी मारने वाले को पसंद नहीं करता।" (31:18)
आवाज़ धीमी रखना “और अपनी चाल में एतदाल रख और अपनी आवाज़ पस्त रख। यक़ीनन आवाज़ों में सबसे बुरी आवाज़ गधों की है।" (31:19)
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