स्त्री मांगे बस तेरा प्यार
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कविता

स्त्री मांगे बस तेरा प्यार


स्त्री मांगे बस तेरा प्यार

ना मांगे बंगला

ना मांगे कार

स्त्री मांगे बस तेरा प्यार।।


तू ही आशा

तू ही निराशा

तू ही उसका सारा संसार

स्त्री मांगे बस तेरा प्यार।।


छूटे मां - बाप

भाई - बहन छूटे

छूटे सारे दोस्त और यार

स्त्री मांगे बस तेरा प्यार।।


पेट में रोटी

तन पर कपड़े

रहने को एक मजबूत मकान

ये तो मिले उसे जन्म से ही

ना तूने दिया उसे पहली बार

स्त्री मांगे बस तेरा प्यार।।


घर की रसोई

बच्चे का रोना

बड़ों का आदर और सत्कार

बंध के इस विवाह - बंधन में

बढ़ा उसके कंधों का भार

जीवन के इस कठिन सफर में

तू ही उसका इकलौता यार

स्त्री मांगे बस तेरा प्यार।

स्त्री मांगे बस तेरा प्यार।।

ज़हरा फरहीन

मुजफ्फरपुर (बिहार)

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