सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग कितना घातक?
रोज़ की तरह उस दिन भी मैंने मोबाइल हाथ में लिया और समाचार पढ़ने लगी। तभी एक शीर्षक ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया "जिन सौंदर्य प्रसाधनों पर दूसरे देशों में प्रतिबंध लगाया जा चुका है, वही उत्पाद भारत में बड़े पैमाने पर बेचे जा रहे हैं।" आगे पढ़ते-पढ़ते चिंता और भी बढ़ गई। कुछ ऐसे सौंदर्य प्रसाधनों का उल्लेख था जिन पर भारत में भी प्रतिबंध या कड़े प्रतिबंधित निर्देश हैं, फिर भी उनका निर्माण, बिक्री और उपयोग जारी है। यह पढ़कर मैं स्तब्ध रह गई।
मन में कई प्रश्न उठने लगे। जिन सौंदर्य प्रसाधनों का हम प्रतिदिन सहजता से उपयोग करते हैं या अपने बच्चों और परिवार के लिए खरीदते हैं, उनमें वास्तव में क्या होता है? क्या वे सचमुच सुरक्षित हैं? या फिर गोरा, सुंदर और आकर्षक दिखने की चाह में हम अनजाने में अपनी त्वचा ही नहीं, बल्कि अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को भी खतरे में डाल रहे हैं? इन प्रश्नों ने मुझे भीतर तक विचलित कर दिया और इस विषय का गंभीर अध्ययन करने की प्रेरणा दी।
मेरी यह चिंता निराधार नहीं थी। हाल ही में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कुछ त्वचा को गोरा करने वाली क्रीमों में पारा (Mercury) और सीसा (Lead) जैसी भारी धातुएँ सुरक्षित सीमा से अधिक मात्रा में पाए जाने पर उनकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे तत्वों का लंबे समय तक उपयोग करने से केवल त्वचा संबंधी समस्याएँ ही नहीं होतीं, बल्कि गुर्दे, तंत्रिका तंत्र और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंग भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी त्वचा को गोरा करने वाले कुछ उत्पादों में पारे जैसे विषैले तत्वों के उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इसी कारण अनेक देशों ने ऐसे उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर कठोर प्रतिबंध लगाए हैं।
आज ऑनलाइन बाज़ारों से लेकर स्थानीय दुकानों तक नकली और निम्न गुणवत्ता वाले सौंदर्य प्रसाधनों की बिक्री के अनेक मामले सामने आ रहे हैं। कम कीमत, आकर्षक पैकेजिंग और कुछ ही दिनों में गोरा बनाने के दावे करने वाले विज्ञापन उपभोक्ताओं को आसानी से प्रभावित कर देते हैं। इस खतरे का प्रमाण महाराष्ट्र में भी देखने को मिला, जहाँ खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने राज्यव्यापी अभियान चलाकर लगभग 34.61 लाख रुपये मूल्य के नकली, निम्न गुणवत्ता वाले और भ्रामक दावे करने वाले सौंदर्य प्रसाधनों को जब्त किया। यह कार्रवाई इस बात की ओर संकेत करती है कि केवल विज्ञापनों या सस्ती कीमत से प्रभावित होकर उत्पाद खरीदना उचित नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता, वैधता और विश्वसनीयता की जाँच करना प्रत्येक उपभोक्ता की जिम्मेदारी है।
भारत में सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण और बिक्री के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) तथा अन्य नियामक संस्थाओं द्वारा स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को केवल प्रमाणित, लाइसेंस प्राप्त और विश्वसनीय उत्पाद ही खरीदने चाहिए। किसी भी उत्पाद का उपयोग करने से पहले उसके लेबल पर लिखे घटकों, निर्माता की जानकारी तथा निर्माण और समाप्ति तिथि की जाँच अवश्य करनी चाहिए।
सुंदर दिखने की इच्छा मनुष्य के स्वभाव का स्वाभाविक हिस्सा है। स्वयं को स्वच्छ, सुसज्जित, आकर्षक और आत्मविश्वासी बनाए रखने में कोई बुराई नहीं है। यही कारण है कि आज महिलाएँ, पुरुष और यहाँ तक कि किशोर-किशोरियाँ भी विभिन्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करने लगे हैं। लेकिन जब यह उपयोग आवश्यकता से आगे बढ़कर केवल दिखावे, सोशल मीडिया के प्रभाव या दूसरों से तुलना की मानसिकता का परिणाम बन जाता है, तब यही सौंदर्य प्रसाधन लाभ के बजाय नुकसान का कारण बन सकते हैं।
वास्तविक समस्या सौंदर्य प्रसाधनों में नहीं, बल्कि उनके अंधाधुंध और असंतुलित उपयोग में है। हर चमकती त्वचा महँगी क्रीम का परिणाम नहीं होती और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने वाला हर उत्पाद प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो, यह भी आवश्यक नहीं है। इसलिए किसी भी उत्पाद का उपयोग करने से पहले उसकी गुणवत्ता, उसमें मौजूद घटकों, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा अपनी त्वचा के प्रकार को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक है।
त्वचा रोग विशेषज्ञ किसी भी नए उत्पाद का उपयोग करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करने की सलाह देते हैं। यदि खुजली, जलन, लालिमा या सूजन जैसी कोई समस्या दिखाई दे तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए। केवल विज्ञापनों, फिल्मी हस्तियों या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के प्रभाव में आकर किसी भी उत्पाद को खरीदना उचित नहीं है।
यह भी याद रखना चाहिए कि प्राकृतिक सौंदर्य का कोई विकल्प नहीं है। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, भरपूर पानी, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त जीवनशैली त्वचा को स्वस्थ और स्वाभाविक रूप से चमकदार बनाए रखने के लिए किसी भी महँगे सौंदर्य प्रसाधन से अधिक प्रभावी सिद्ध होती है।
इस संदर्भ में माता-पिता की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सोशल मीडिया द्वारा बनाए गए अवास्तविक सौंदर्य मानकों के कारण आज अनेक किशोर-किशोरियाँ कम उम्र में ही विभिन्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग करने लगे हैं। उन्हें यह समझाना आवश्यक है कि किसी व्यक्ति का वास्तविक सौंदर्य उसके चरित्र, आत्मविश्वास, ज्ञान और व्यवहार में होता है, केवल चेहरे के रंग या चमक में नहीं।
सौंदर्य प्रसाधनों का संतुलित और जागरूक उपयोग आत्मविश्वास बढ़ा सकता है, लेकिन उनका अंधाधुंध उपयोग शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याओं को जन्म दे सकता है। सौंदर्य प्रसाधन हमारे शत्रु नहीं हैं, किंतु उनका अविवेकपूर्ण उपयोग निश्चित रूप से हानिकारक है। चेहरे की सुंदरता कुछ समय के लिए हो सकती है, लेकिन स्वस्थ त्वचा और स्वस्थ शरीर जीवन भर की अमूल्य संपत्ति हैं।
परवीन खान
पुसद, महाराष्ट्र