इस मानसून सीज़न रहें एकदम स्वस्थ
article-image
स्वास्थ्य

इस मानसून सीज़न रहें एकदम स्वस्थ


यूं तो मानसून का सीज़न हमारे देश में खुशियों की सौगात लेकर आता है। फसलें लहलहाने लगती हैं, किसानों के चेहरे ख़िल उठते हैं, सूखा पड़ने से बच जाता है और गर्मी से लोगों को राहत मिल जाती है। लेकिन इस मानसून सीज़न में अनेकों बीमारियां भी अपने पैर पसारने लगती हैं। जैसेः- डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया, वायरल बुख़ार, सर्दी ज़ुकाम, टाइफाइड, हैजा आदि। आज हम इन बीमारियों के कारण, लक्षण और बचाव पर चर्चा करेंगे।

यूं तो मानसून का सीज़न हमारे देश में खुशियों की सौगात लेकर आता है। फसलें लहलहाने लगती हैं, किसानों के चेहरे ख़िल उठते हैं, सूखा पड़ने से बच जाता है और गर्मी से लोगों को राहत मिल जाती है। लेकिन इस मानसून सीज़न में अनेकों बीमारियां भी अपने पैर पसारने लगती हैं। जैसेः- डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया, वायरल बुख़ार, सर्दी ज़ुकाम, टाइफाइड, हैजा आदि। आज हम इन बीमारियों के कारण, लक्षण और बचाव पर चर्चा करेंगे।

डेंगूः डेंगू एक वायरल बीमारी है जो मच्छरों के काटने से फैलती है, यह कभी कभी जानलेवा भी बन जाती है। इसके मच्छर दिन और शाम के समय काटते हैं।

डेंगू बुख़ार के लक्षणः

अचानक से तेज़ बुख़ार आना, मतली या उल्टी होना, त्वचा पर लाल निशान आना, सिर में तेज़ दर्द होना।

उपचारः डेंगू बुख़ार होने पर मरीज़ को हाईड्रेशन और प्लेटलेट्स बढ़ाने वाली दवाओं का प्रयोग करना चाहिए और साथ ही कुछ घरेलू इलाज जैसे पपीते के पत्ते का रस, गिलोय का रस और भरपूर तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए।

गिलोय का रस शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, तुलसी से प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत होती है। और नारियल पानी से शरीर को इलेक्ट्रोलाइट्स भरपूर मात्रा में मिलते हैं जिससे कमज़ोरी दूर होती है।

मलेरियाः मलेरिया का बुख़ार एनोफिलीज़ नामक मच्छर के फैलने से होता है जो कि अकसर बारिश के पानी के जमा होने से पनपते हैं। 

मलेरिया के लक्षणः

तेज़ बुख़ार आना, ठंड लगना, पसीना आना, थकान महसूस होना।

उपचारः यदि बुख़ार तीन दिन से अधिक आ रहा है और ठंड लग रही है तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और ब्लड टेस्ट कराकर इलाज शुरु करें। साथ ही घर में तुलसी व अदरक की चाय का सेवन करें। तुलसी व अदरक की चाय पीने से शरीर में संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। अदरक में एंटी इंफ्लेमेटरी और तुलसी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं।

इसके अलावा घर को साफ़ सुथरा रखना चाहिए, घर के किसी भी कोने में पानी नहीं जमने देना चाहिए। सोने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए।

चिकुनगुनियाः यह एक वायरल बीमारी है जो मच्छरों के काटने से फैलती है। 

लक्षणः 

तेज़ बुख़ार आना, जोड़ों में तेज़ दर्द होना, जोड़ों में सूजन आ जाना, त्वचा पर लाल दाने उभरना, मांसपेशियों में खिंचाव होना, थकान महसूस होना।

उपचारः चिकुनगुनिया होने पर तुंरत डॉक्टर की सलाह लेना बेहद ज़रुरी है। इसके अतिरिक्त कुछ घरेलू उपचार भी साथ साथ किया जा सकता है। जैसेः हल्दी वाला दूध पीना, लहसून की कली खाना, शरीर को हाइड्रेड रखना।

हल्दी में एंटी इन्फ्लेमेटरी एजेंट होते हैं। एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी और एक चुटकी काली मिर्च डालकर पीने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।

लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट के गुण होते हैं। इसे कच्चा खाने से आराम मिलता है।

घर की साफ सफ़ाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए, घर के बाहर भी कचरा जमा नहीं होने देना चाहिए, शरीर को पूरी तरह से ढंक कर रखना चाहिए व सूती कपड़े पहनना चाहिए।

इन बीमारियों के अलावा मानसून सीज़न में मच्छरों के काटने व गंदगी से टाइफाइड व हैजा फैलने के भी चांस ज्यादा रहते हैं। इनके बचाव का भी बेहद असरदार उपाय है कि साफ सफ़ाई का विशेष ध्यान रखा जाए, पानी उबाल कर पिया जाए। दूषित पानी व खाने से भी यह बीमारियां फैलती हैं।

टाइफाइड के लक्षणः

बुख़ार और लगातार कमज़ोरी, सिरदर्द, पेट दर्द, कब्ज़ और दस्त, भूख़ कम लगना, सूखी खांसी आना।

उपचारः डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का नियमति रुप से सेवन करें। इसके अलावा घरेलू उपचार में तुलसी के पत्ते और शहद का सेवन किया जा सकता है। साथ ही उबला हुआ पानी पीना चाहिए।

नारियल पानी और ओआरएस का अधिक सेवन करना चाहिए।

यदि दस्त ज़्यादा आ रहे हों तो दही का सेवन करना चाहिए।

हैजाः हैजा Vibrio cholerae नामक बैक्टीरिया द्वारा दूषित किए भोजन या पानी के सेवन से होता है।

लक्षणः

चावल के मांड जैसे दस्त होना, उल्टी होना, मांसपेशियों में खिंचाव होना, थकान लगना और मुंह सूखना, आंखों के नीचे काले धब्बे होना, लो ब्लड प्रेशर, चक्कर आना।

उपचारः हैजा में शरीर में पानी की कमी होने का ख़तरा ज़्यादा होता है, इसलिए ओआरएस का सेवन अधिक करना चाहिए। नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे तरल पदार्थ अधिक मात्रा में लेना चाहिए।

हैजा से बचाव के लिए हमेशा उबला हुआ पानी पीना चाहिए, खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिए, बाहर का खुला हुआ खाना नहीं खाना चाहिए।


- डॉ. मुहम्मद अख़लाक़ (B.U.M.S.)

  मुंबई, महाराष्ट्र

हालिया अपलोड

img
अपडेट
साक्षरता दिवस: बेटियों की घरेलू शिक्षा,...

साक्षरता का वास्विक अर्थ केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है। सामान्य...

img
अपडेट
इंजीनियर दिवस : जानें इतिहास में...

आज जब हम इंजीनियर शब्द सुनते हैं तो हमारे सामने कंप्यूटर, रोबोट,...

img
अपडेट
नेशनल विमेंस फोरम फॉर पीस एंड...

नेशनल विमेंस फोरम फॉर पीस एंड हार्मनी (NWFPH) को 19 अगस्त 2026...

img
अपडेट
शांति दिवस : संवाद, न्याय एवं...

आज की दुनिया तकनीक, विज्ञान और आर्थिक प्रगति के अभूतपूर्व दौर से...

Editorial Board

Arefa PareveenChief Editor

Khan ShaheenEditor

Saheefah KhanSub Editor

Members