मां मैं भी एक कविता लिखूं।
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साहित्य

मां मैं भी एक कविता लिखूं।



मां मैं भी एक कविता लिखूं।

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मन में आता है मेरे भी

मां मैं भी एक कविता लिखूं

भारी-भारी बोझल मन से

मैं भारत की गाथा लिखूं


वह कविता जिसके शब्दों में

प्रेम की गाथा, प्यार का रस हो

जिसकी शब्द गदा के आगे

नफरत का हर रथ बेबस हो


दुर्जन को दुर्जन लिखने में

जिसमें अक्षर कांप न जाएं

तन तन जाए सांस की डोरी

शब्द की सेना हांप न जाए


प्रेम हो जिसमें, आस हो जिसमें

पुरखों का विश्वास हो जिसमें


जिसमें मां सब कुछ आए पर

पुण्य नाम पर पाप ना आए

घृणा का अभिशाप ना आए

राम-राम हो अभिवादन में

लेकिन जय सियाराम ना आए

जिसमें राम रहीम ना आए

जिसमें आसाराम ना आए

जिसमें ना आए कोई निर्भया, कोई आसिफा कोई अंकिता

जिसमें कोई फोगाट ना आए

जिसमें दीप तो आए लेकिन सेंगर और कुलदीप ना आए


सज्जन का सत्कार हो जिसमें

निर्बल का उद्धार हो जिसमें

पत्र हो और अखबार हो जिसमें

उन पर सच का भार हो जिसमें

सावन की मल्हार हो जिसमें

रांझा हीर सा प्यार हो जिसमें

फूलों का व्यापार हो जिसमें

चंपा की महकर हो जिसमें


जिसमें कोई विरही बंजारन

कजरी गाए भैरू गाए

जिसमें कोई चंचल बंजारा

ताल उठाए आग लगाए


जिसमें निर्भय होकर अपनी

बात भी भंवरे कह लेते हों

मिलजुल कर जिसमें बनवासी

पीर विरह की सह लेते हों


आशाओं के जुगनू जिसमें

घोर अंधेरे पर छा जाएं

जिस के शीतल कोमल स्वर में

सावन की बदरी उतराएं


प्रेम की कविता आस की कविता

पुरखों के विश्वास की कविता


मन में आता है मेरे भी मां मैं भी एक कविता लिखूं


तेरा चंदा जैसा मुखड़ा

फीका फीका उखड़ा उखड़ा

जाने क्यों असहाय खड़ी है

मन में छुपाए मान का दुखड़ा


सिंहासन पर एक मधुबाला

बांट रही है ज़हर का प्याला

धूल उड़ाए शोर मचाए

अंधा होकर पीने वाला


पग पग अबला चीर हरण है

सत्ता है या कुंभकरण है

गमछा धारी हैवानों पर

किसकी दया है किसकी शरण है


ताज महल है ताजो महालय

मस्जिद मस्जिद तले शिवालय

सत्ता की अभिलाषा में गुम

मन की बात सुनाने वाले


धर्म धनुष के बांण चले हैं

मानवता के प्रांण चले हैं

धोंस ध्वज के आगे हे मां !

कब कोई प्रमाण चले हैं


मैं फिर भी चुपचाप ना बैठूं

जीवन लिखूं आशा लिखूं

मधुबन की अभिलाषा लिखूं


मन में आता है मेरे भी मां मैं

भी एक कविता लिखूं

मां मैं भी एक कविता लिखूं



सरफ़राज़ बज़्मी

शायर, सवाई माधोपुर, राजस्थान


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