बच्चों का स्कूल खुल गया और आप तैयार हैं?
बेड पर बदहवास पड़ी आंचल कमरे की एक दीवार को टकटकी लगाए देखे जा रही थी। सांसे उसकी अभी भी तेज़ तेज़ चल रही थी, दिल ज़ोरें ज़ोर से धड़क रहा था और दिमाग में अभी भी ढेर सारी उलझनें सवार थीं। कहने को तो वह आराम कर रही थी..परिवार वालों की तरफ़ से सख्त निर्देश मिले थे कि “कोई काम नहीं करना है..बस आराम करना है!” लेकिन उन्हें कौन समझाए कि अगर उसने सब काम छोड़ दिया तो घर की पूरी व्यवस्था उलट पलट जाएगी। बच्चों के यूनिफॉर्म सही जगह पर नहीं मिलेंगे, किताबें, स्टेशनरी ढूंढते ढूंढते टाइम बर्बाद हो जाएगा..ख़ाना किसी तरह बन जाएगा लेकिन किचन की जो हाल होगी वह पूछो मत..और शायद बच्चों के पिता समय पर ऑफिस ही ना जा पाएं क्योंकि उनका कपड़ा, ऑफिस के लिए लंच..व्यवस्थित फाइलें..यह सब तो आंचल ही कर के देती थी ना...तो फ़िर आंचल को हुआ क्या???
असल में जुलाई का महीना शुरु हो गया और बच्चों के स्कूल खुल गए..छुट्टियों में बच्चों के साथ समय बिताते, उनकी फ़रमाईश पूरी करते करते आंचल को टाइम ही नहीं मिला की वह जुलाई का शेड्यूल पहले से तैयार करती और टाइम मैनेजमेंट करती ताकि स्कूल खुलने पर कोई समस्या ना आती। नतीजा यह हुआ कि बच्चों के स्कूल खुलने के दो दिन बाद ही वह ज़बरदस्त बीमार पड़ गई। तो कहीं आप भी इस तरह की समस्या से नहीं जूझ रही हैं ना? तो आइए आपके लिए हम लाए हैं टाइम मैनेजमेंट के कुछ टिप्स जिससे आपकी ज़िंदगी बेहतर हो जाएगी—
1 टाइम ब्रेकिंगः- सुबह से लेकर रात तक के समय को छोटे छोटे टुकड़ों में बांटे। जैसे सुबह 6 बजे से 6:30 बजे तक का समय आपकी हीलिंग (एक्सरसाइज़, वॉकिंग आदि) के लिए। 6:30 से 7:30 तक का टाइम बच्चों के टिफिन की तैयारी और उनको स्कूल भेजने के लिए। 7:30 से 8:30 तक का टाइम किचन समेटने और बाकी बचे कामों के लिए। उसके बाद थोड़ा समय नाश्ते और खुद के लिए निकालें। इस टाइम में आप न्यूज़पेपर, मैग्ज़ीन पढ़ सकती हैं या कुछ क्रिएटिव काम। इस तरह पूरे दिन का शेड्यूल बनाएं।
2 ख़ाना बनाने की तैयारीः आज खाने में क्या बनेगा इसकी तैयारी एक दिन पहले से ही कर लें। जैसे सब्ज़ी पहले से खरीद कर रख लें। छोटी मोटी तैयारी पहले से ही कर लें इससे टाइम की बचत हो जाती है।
3 बच्चों को आत्मनिर्भर बनाएः बच्चों को अपने छोटे मोटे काम खुद ही करने दें। जैसे स्कूल बैग तैयार करना, जूते मोज़े जगह पर रखना, कॉपी किताब खुद से व्यवस्थित करना आदि।
4 डायरी मेंटेन करनाः जैसे बच्चों की स्कूल डायरी होती है छोटी मोटी ज़रुरतों को नोट करने के लिए, उसी प्रकार की अपनी एक डायरी बनाइए जिसमें आपके जो भी आज के काम है या कल करने हैं या किसी खास दिन किसी से करवाने है, कुछ सामान मंगवाना है वह सब नोट करती जाइए। इससे काम आसानी से हो जाता है और समय की भी बचत होती है।
5 अपनी ख्याल रखें: याद रखें कि आपकी सेहत के साथ आपके बच्चों और परिवार की खुशियां जुड़ी हुई हैं। यदि आप बीमार पड़ गईं तो घर का पूरा अनुशासन और बच्चों की पढ़ाई सब प्रभावित हो जाएगी। इसलिए अपनी सेहत का विशेष ध्यान दें। कोई भी छोटे लक्षण को इग्नोर ना करें। नियमित रुप से अपना हेल्थ चेकअप करवाते रहें। दिनभर के कामों में कुछ पल फुर्सत के अपने लिए ज़रुर निकालें।
सहीफ़ा ख़ान
उप संपादक