मायूसी दूर करने का रास्ता
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दिव्य ज्योति

मायूसी दूर करने का रास्ता


قُلْ يَا عِبَادِيَ الَّذِينَ أَسْرَفُوا عَلَىٰ أَنْفُسِهِمْ لَا تَقْنَطُوا مِنْ رَحْمَةِ اللَّهِ

और अल्लाह की रहमत से निराश न हो, क्योंकि अल्लाह की रहमत से केवल काफ़िर ही निराश होते हैं।"

(सूरह यूसुफ़ : 87)

जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं जब चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा दिखाई देता है। कभी कोई प्रिय सपना टूट जाता है, कभी अथक परिश्रम के बाद भी सफलता नहीं मिलती, कभी बीमारी, आर्थिक कठिनाई या रिश्तों की उलझनें इंसान को भीतर तक थका देती हैं। ऐसे समय में सबसे पहले जो चीज़ कमजोर पड़ती है, वह है — उम्मीद।

उम्मीद केवल एक भावना नहीं, बल्कि जीने की ताकत है। जब उम्मीद जीवित रहती है तो इंसान कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना कर लेता है, लेकिन जब उम्मीद बुझ जाती है तो रास्ते होते हुए भी दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि कुरआन बार-बार इंसान को मायूसी से बचाता है और उसे अल्लाह की रहमत से जुड़े रहने की शिक्षा देता है।

एक मोमिन की सबसे बड़ी पहचान यही है कि वह परिस्थितियों से नहीं, अपने रब से उम्मीद रखता है। दुनिया के दरवाज़े बंद हो सकते हैं, लेकिन उसे विश्वास होता है कि उसके रब का दरवाज़ा कभी बंद नहीं होता।

 उम्मीद की जड़ कहाँ है?

कुरआन हमें सिखाता है कि उम्मीद की जड़ तवक्कुल अर्थात अल्लाह पर भरोसा है। जब इंसान यह मान लेता है कि इस पूरी कायनात का मालिक, संचालक और संरक्षक अल्लाह है, तब उसके भीतर एक नया आत्मविश्वास पैदा होता है।

नबी ने हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ि.) को नसीहत करते हुए फरमाया:

"अल्लाह की हिफ़ाज़त करो, वह तुम्हारी हिफ़ाज़त करेगा। अल्लाह को याद रखो, तुम उसे अपने सामने पाओगे।"

यह केवल एक हदीस नहीं, बल्कि उम्मीद का सबसे बड़ा स्रोत है। जब इंसान अपने रब से जुड़ जाता है, तो वह खुद को अकेला महसूस नहीं करता। उसे यह एहसास रहता है कि हर परिस्थिति में अल्लाह उसके साथ है, उसकी सुन रहा है और उसके लिए सबसे बेहतर फैसला कर रहा है।

कई बार हमारी निराशा की वजह यह होती है कि हम हर चीज़ को अपने नियंत्रण में रखना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि जीवन हमारी योजनाओं के अनुसार चले। लेकिन जब ऐसा नहीं होता तो हम टूटने लगते हैं।

यहीं पर तक़दीर पर ईमान इंसान को सुकून देता है।

नबी ने फरमाया कि यदि पूरी दुनिया मिलकर तुम्हें कोई लाभ पहुँचाना चाहे तो उतना ही लाभ पहुँचा सकती है जितना अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है, और यदि सब मिलकर नुकसान पहुँचाना चाहें तो उतना ही नुकसान पहुँचा सकते हैं जितना अल्लाह ने पहले से निर्धारित कर दिया है।

जब यह सत्य दिल में उतर जाता है तो इंसान "काश ऐसा हो जाता" और "अगर वैसा हो जाता" जैसी बातों में उलझना छोड़ देता है। वह समझ जाता है कि जो उसे नहीं मिला, वह उसके लिए लिखा ही नहीं गया था और जो उसके लिए लिखा गया है, उसे कोई छीन नहीं सकता।

यही समझ उम्मीद को जन्म देती है और निराशा को दूर करती है।

तवक्कुल का अर्थ है पूरी मेहनत करना, सभी उचित साधनों का उपयोग करना और फिर परिणाम को अल्लाह के हवाले कर देना।

एक विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी करता है, एक किसान खेत जोतता है, एक व्यापारी योजना बनाता है। यह सब प्रयास तवक्कुल के विरुद्ध नहीं हैं, बल्कि उसका हिस्सा हैं। अंतर केवल इतना है कि मोमिन साधनों का उपयोग करता है, लेकिन उसका भरोसा साधनों पर नहीं, बल्कि अल्लाह पर होता है।

उसे विश्वास होता है कि सफलता का वास्तविक स्रोत केवल अल्लाह है।

 क्या हो जब रास्ते दिखाई न दें

उम्मीद की सबसे सुंदर मिसाल हमें हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के जीवन में मिलती है।

सामने समुद्र था और पीछे फिरऔन की विशाल सेना। हर दृष्टि से बच निकलना असंभव प्रतीत हो रहा था। उनके साथियों ने घबराकर कहा कि अब हम पकड़े जाएँगे।

लेकिन मूसा (अ.) ने कहा:

"हरगिज़ नहीं! मेरा रब मेरे साथ है, वह मुझे रास्ता दिखाएगा।"

यही ईमान है। यही उम्मीद है।

उम्मीद का अर्थ यह नहीं कि हमें समाधान दिखाई दे रहा हो, बल्कि यह है कि समाधान दिखाई न देने पर भी हमें अपने रब पर भरोसा हो। मोमिन का दिल परिस्थितियों से नहीं, अल्लाह के वादों से शक्ति प्राप्त करता है।

जब तवक्कुल गहरा हो जाता है तो इंसान के भीतर "तस्लीम और रज़ा" की भावना पैदा होती है। वह अल्लाह के फैसलों को स्वीकार करना सीख जाता है। वह जानता है कि हर घटना के पीछे कोई न कोई हिकमत छिपी होती है, चाहे वह उसे तत्काल समझ में आए या नहीं।


ऐसा व्यक्ति कठिनाइयों में भी यह विश्वास नहीं खोता कि अल्लाह उसके लिए कोई बेहतर रास्ता तैयार कर रहा है। यही विश्वास उसे सब्र देता है और यही सब्र उसकी उम्मीद को जीवित रखता है।

आज का युग चिंता, तनाव और अनिश्चितता का युग कहा जाता है। ऐसे समय में कुरआन हमें उम्मीद का एक ऐसा स्रोत प्रदान करता है जो कभी सूखता नहीं। वह स्रोत है— अल्लाह पर भरोसा।

जब इंसान अपनी पूरी कोशिश करने के बाद अपने मामलों को अल्लाह के सुपुर्द कर देता है, तो उसके दिल का बोझ हल्का हो जाता है। उसे यकीन होता है कि उसका रब उससे अधिक जानता है, उससे अधिक प्रेम करता है और उसके लिए वही चुनता है जिसमें वास्तविक भलाई है।

इसीलिए एक सच्चा मोमिन परिस्थितियों से टूट सकता है, थक सकता है, आँसू भी बहा सकता है, लेकिन वह मायूस नहीं होता। क्योंकि उसके दिल में यह विश्वास हमेशा जीवित रहता है कि अंधेरी रात कितनी ही लंबी क्यों न हो, उसके रब की रहमत की सुबह अवश्य आएगी।

और यही उम्मीद, ईमान की सबसे खूबसूरत रोशनी है।


 ज़ैनबुल गज़ाली

उत्तर प्रदेश

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