मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुक होना महिलाओं के लिए बेहद ज़रुरी
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संवाद

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुक होना महिलाओं के लिए बेहद ज़रुरी

एक ओर जहां हमारे समाज ने विकास के विभिन्न आयामों से गुज़रते हुए अनेक क्षेत्रों में सफलता के नित नए झंडे गाढ़े हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे अंधविश्वास और कुरीतियां हमारे समाज में अभी भी मौजूद हैं जिसका दंश महिलाओं को सबसे अधिक भुगतना पड़ता है। इसमें एक है मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अनेकों भ्रांतियां मौजूद है जिस कारण यदि कोई व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से गुज़र रहा है तो उसे पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता। विशेषरुप से महिलाओं को, उनके बदले व्यवहार, चिड़चिड़ेपन को अकसर हम झगड़ालू, बहुत तेज़ है, या ज़बान की बदत्तमीज़ इत्यादि का टैग देकर उनकी समस्याओं को अनदेखा कर देते हैं। जबकि उनके इस व्यवहार पर घर का माहौल, घरेलू कलह बहुत बड़ा कारण होता है। इन्हीं तमाम मुद्दों को समझने के लिए क्लीनिकल सॉइकोलॉजिस्ट अस्मा तब्स्सुम करीमुल्लाह से सहीफ़ा खान का संवाद। असमा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कार्य करने वाली संस्था अमाहा में सीनियर कंस्लटेंट हैं।

मानसिक स्वास्थ्य क्या है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसी स्थिति है जिसमें हर व्यक्ति अपनी अपनी क्षमता के अनुसार काम करता है। जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, प्रभावी ढंग से रचनात्मक कार्य करते हुए समाज व समुदाय में योगदान दे सकता है।

क्या घरेलू कलह का मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर असर होता है?

बिल्कुल, घरेलू झगड़े निश्चित रुप से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं। इससे भावनात्मक बोझ बढ़ता है जिस कारण शरीर में कार्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है (उच्च तनाव के स्तर के दौरान प्रवाहित होने वाले हार्मोन होते), इससे व्यक्ति के कार्य करने की क्षमता बाधित होती है क्योंकि जब मन विवादों और नकरात्मक विचारों से भर जाता है तो जीवन के अन्य क्षेत्रों में काम करने की सामान्य दक्षता कम हो जाती है।

यह कैसे मालूम होगा कि कोई महिला मानसिक रुप से अस्वस्थ्य है?

यह बड़ी विडंबना है कि हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य को कम आंका जाता है, जिसके कारण कई महिलाएं चुपचाप अंदर ही अंदर घुलती रहती हैं। यदि कोई महिला समाज या अपने आस पास के लोगों से घुल मिल नहीं रही है, और अलग थलग रहना पसंद कर रही है तो यह बहुत बड़ा संकेत है उसके मानसिक रुप से अस्वस्थ्य होने का। हमें चाहिए कि हम इसके प्रति जागरुकता लाने के लिए अपने समाज में इस प्रकार का सहिष्णु माहौल बनाए कि मानसिक स्वास्थ्य पर कोई भी सहज रुप से बातचीत कर सके।

क्या मानसिक स्वास्थ्य पर पर्यावरण का भी प्रभाव पड़ता है?

मानसिक स्वास्थ्य एक गतिशील प्रक्रिया है जो पर्यावरण से प्रभावित होती है। क्योंकि व्यक्ति अलगाव में नहीं रह सकता, वह लगातार अपने आसपास की दुनिया के संपर्क में रहता है जिसका सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार का प्रभाव उसके व्यक्तित्व पर देखने को मिलता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पर्यावरण व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है।

मानसिक स्वास्थ्य पर पारिवारिक पृष्ठभूमि का कितना प्रभाव पड़ता है?

पारिवारिक पृष्ठभूमि मानिसक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को पनपने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आनुवांशिक विरासत, परिवार में मानसिक बीमारी की प्रवृत्ति का पहले से मौजूद होने के कारण उस परिवार के सदस्य पर उसका प्रभाव पड़ सकता है। इसी प्रकार, पालन-पोषण के पैटर्न, संघर्ष या समाधान के लिए सामान्य माहौल, बचपन में उपेक्षा या दुर्व्यवहार होना व्यक्ति की पहचान और स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकते हैं।

क्या मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सा विज्ञान का विषय है या सामाजिक विज्ञान का?

मेरी राय में, यह चिकित्सा और सामाजिक विज्ञान दोनों का मिश्रण है। मानसिक स्वास्थ्य के सिद्धांत और चिकित्सा का अभ्यास यह दोनों अनुभवों और शोध पर आधारित हैं। क्योंकि मानव स्थिति समाज के भीतर व्यक्ति की संरचना से सबंधित है, इसलिए इसमें समाजशास्त्रीय प्रक्रियाओं की भी समझ शामिल है।

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता लाने में समाज और व्यक्ति की क्या भूमिका हो सकती है?

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता एक व्यक्तिगत स्तर से लेकर सामाजिक स्तर तक की आवश्यकता है। एक व्यक्तिगत स्तर पर, मूलभूत ज़िम्मेदारी यह होनी चाहिए कि इंसान खुद को मानसिक स्वास्थ्य की समझ के प्रति सशक्त बनाए। इसके महत्व को समझे, भावनाओं एवं मानसिक बीमारी के आसपास के स्टीरियोटाइप और कलंक को समाप्त करने का प्रयास करे। जो लोग इस मानसिक संकट से गुज़र रहे हैं उनके प्रति सहानुभूति और सहिष्णु दृष्टिकोण अपनाकर उन्हें इससे बाहर निकालने का प्रयास करे।

सामाजिक स्तर पर यह ज़रुरी है कि मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य ही इतना महत्व मिले। इसके अतिरिक्त समाज में ऐसा सहज माहौल एवं सुविधा उपलब्ध हो कि मानसिक बीमारी से जुझ रहे व्यक्ति को उचित देखभाल और पर्याप्त इलाज आसानी से मिल सके। क्योंकि किसी व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य पूरे समाज पर प्रभाव डालता है। इसलिए समाज को सुलभ व संतुलित बनाए रखने के लिए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता ज़रुरी है।

महिलाओं को मानसिक सेहत के प्रति आप क्या संदेश देना चाहेंगी?

महिलाएं कई प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं के जोखिम में रहती हैं। उनकी भावनात्मक संवेदनशीलता के साथ साथ घरेलू विवाद और अक्रामकता के शिकार होने से उनके लिए एक गंभीर स्थिति बनने का चांस बना रहता है। जिसे अकसर अनदेखा किया जाता है और जिससे कोई महिला चुपचाप गंभीर मानसिक संकट से गुज़र रही होती है। मेरा महिलाओं के लिए यह संदेश होगा कि सबसे पहले स्वयं को सही ज्ञान से सशक्त बनाएं और मानसिक बीमारी से संबंधित जो अंधिवश्वास हमारे समाज में मौजूद है उससे दूर रहें। दूसरा एक मज़बूत सिस्टरहुड कायम करें जो ज़रुरत के समय एक दूसरे की मदद करे, एक दूसरे पर विश्वास करे। तीसरा, महिलाओं के साहसिक और लचीलेपन पर भरोसा रखें और संकट के समय में मदद मांगने और फिर से उठने से ना डरें।


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