एपस्टीन फाइल : पैसा आपको सफ़ल बना सकता है सभ्य नहीं
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कवर स्टोरी

एपस्टीन फाइल : पैसा आपको सफ़ल बना सकता है सभ्य नहीं

मुझे बताया गया था कि मैं एक मसाज के लिए 200 डॉलर कमाऊंगी। मैं केवल 14 साल की थी और उस समय मुझे पैसे की ज़रुरत थी। लेकिन उसके बाद जो हुआ वह लंबे समय तक मुझे डराता रहा। - पीड़िता

धनकुबेरों और एलीट या यूं कहें कि सुपर एलीट क्लास की दुनिया में, जेफरी एपस्टीन ने ना केवल पैसों का बल्कि शोषण का एक साम्राज्य खड़ा कर दिया। 2002 से लेकर 2005 तक उस व्यक्ति ने सैक्स ट्रैफिकिंग का ऐसा जाल बुना जिसमें नाबालिग लड़कियों के साथ जो कुछ होता उसके लिए शोषण शब्द कम पड़ता है। उनके साथ हैवानियत की ऐसी हदें पार की गईं जिसे सुनकर रुह कांप जाती है। जेफरी उन्हें न्यूयॉर्क, पाम बीच और अन्य जगहों से लेकर जाता, कुछ को पैसों का लालच देकर लुभाता तो कुछ को ज़बरदस्ती ले जाया जाता। 

इस घृणित काम में उसका साथ देती जेफरी की साथी घिस्लेन मैक्सवेल (ग्लेन)। पीड़ित लड़कियों का कहना है कि वह लड़कियों को जाल में फंसाने में जेफरी का साथ देती थी। जनवरी 2026 में जैसे ही एपस्टीन फाइल्स का पर्दाफाश हुआ सोशल मीडिया पर जैसे तूफान खड़ा हो गया हो। फाइल के हर एक खुलासे ने लोगों को चौंका कर रख दिया। दर्जनों ऐसे लोगों के नाम सामने आए जो एपस्टीन को जानते थे या फिर उसकी पार्टी में गए। कई बड़े लोग जो समाज के आइडियल समझे जाते थे उनकी छोटी छोटी बच्चियों के साथ आपात्तिजनक तस्वीरें जब सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरु हुई तो ऐसा लगा जैसे हम इक्कीसवीं सदी के सभ्य समाज में रह ही नहीं रहे। एपस्टीन फाइलों में लाखों दस्तावेज़, ईमेल, फोटो, वीडियो और ऐसे रिकॉर्ड्स मौजूद हैं जो जेफरी एपस्टीन के गुनाहों और अमीरों के शौक व हवस के कारनामों का खुलासा करते हैं। 

कौन था जेफरी एपस्टीन?

20 जनवरी 1953 को जेफरी एपस्टीन का जन्म न्यूयॉर्क शहर में हुआ था। 1976 में उसने बैकिंग सेक्टर में काम करना शुरु किया और फिर खुद की फर्म खोली। धीरे धीरे उसकी पहुंच सत्ता में बैठे नेताओं और पैसों में खेल रहे एलीट क्लास तक होती गई। उनके लिए उसने महिलाओं, लड़कियों और यहां तक छोटी बच्चियों को उपलब्ध कराना शुरु किया। 2005 में एक अभिभावक ने एपस्टीन पर उनकी 14 साल की बेटी के यौन शोषण का आरोप लगाया। 2008 में फ्लोरिडा स्टेट की एक अदालत ने उसे सेक्ट ट्रैफिकिंग का दोषी पाया। लेकिन उसकी सत्ता तक पहुंच होने के कारण सिर्फ 13 महीने में ही वह जेल से बाहर आ गया।

6 जुलाई 2019 में फिर से उसे नाबालिगों की तस्करी के जुर्म में गिरफ्तार किया गया और अगस्त 2019 में जेल की बैरक में ही उसकी संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। ऐसा माना जाता है कि उसने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। 

पैसे और पहुंच ने यौन शोषण का साम्राज्य खड़ा कर दिया

यह तो सब जानते थे कि जेफरी एपस्टीन एक राक्षस था जिस पर सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप थे। लेकिन जब फाइलें पब्लिक हुईं तो उससे जुड़े और उसकी मदद से यौन शोषण करने वाले ऐसे ऐसे लोगों के नाम सामने आए जिन्हें जानकर दुनिया स्तब्ध रह गई। यह सच में अविश्वसनीय था कि ऐसे लोगों के नाम जिन्हें दुनिया रोल मॉडल मानती थी। जिनकी तरह बनने का मिडिल क्लॉस सपना देखता है।

एपस्टीन फाइल में आने वाले वह नाम जिन्होंने सबको चौंका दिया

डोनाल्ड ट्रंप, बिल क्लिंटन, एलन मस्क, बिल गेट्स, एंड्रयू माउंटबेटन, स्टिफन हॉकिंग्स, नोम चोमोस्की, हावर्ड लुटनिक, सर्गई ब्रिन, रिचर्ड ब्रैनसन। यह ऐसे लोगों के नाम थे जिन्हें हम सभी किसी ना किसी रुप में रोल मॉडल मानते थे। 

इस फाइल में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी सामने आया। जिससे यह पता चलता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ मामलों में एपस्टीन से सलाह ली इज़राइल जाकर पार्टी में डांस किया। जो कि बेहद शर्मनाक है क्योंकि सब यह जानते थे कि वह एक अपराधी है उसके बावजूद उससे मिलना और उसकी मदद लेना। 

पीएम मोदी के अलावा इस फाइल में अनिल अंबानी और हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल है। कहा जा रहा है कि अनिल अंबानी को एपस्टीन मोदी का आदमी कहता था। और अनिल अंबानी एपस्टीन के घर गए थे। हरदीप सिंह एपस्टीन से न्यूयॉर्क में उसके घर पर कई बार मिले। उससे बिज़नेस कांटैक्ट्स मांगें। हालांकि तीनों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सरासर झूठ बताया है।

जूली के ब्राउन की साहसी पत्रकारिता

सालों तक जेफरी के कारनामों को दुनिया के सामने लाने से रोकने की कवायाद की गई। पीड़ितों को सेटलमेंट से चुप कराया गया, अभियोजकों को खरीदा गया, मीडिया को चुप कराया गया। लेकिन जूली के ब्राउन की खोजी निडर पत्रकारिता ने इस केस को दुनिया के सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जूली मियामी हेराल्ड की खोजी पत्रकार हैं। उन्होंने एपस्टीन केस की जांच शुरु की तो उन्हें भी चुप कराने का प्रयास किया गया, कई बार दबाव बनाया गया। लेकिन जूली ने हार नहीं मानी और एपस्टीन का सच उजागर करने में लगी रहीं। उन्होंने 80 पीड़ितों का पता लगाया और उनसे जाकर मिलीं। उनके दुख दर्द को जाना और समझा, बहुतों ने तो सामने आने से मना कर दिया लेकिन 8 पीड़िताएं अपना सच दुनिया के सामने लाने को तैयार हुईं।

सच अब दुनिया के सामने है

एपस्टीन फाइल के सामने आने से समाज के कई सच उजागर हो गए। एक तो यह कि आपको दिखने वाले समाज के रोल मॉडल वास्तव में रोल मॉडल नहीं होते। कभी कभी वह सभ्यता और सफलता का चोला ओढ़े अंदर से हैवान होते हैं। अपनी हवस के आगे उन्हें इंसानियत तो दूर मासूम बच्चियों की चीख पुकार तक सुनाई नहीं देती। दूसरा सच यह कि एलीट क्लास के यह अमीर लोग एक दूसरे का अपराध छिपाने के लिए किसी भी हद तक जाकर एक दूसरे का साथ देते हैं, न्याय, सही या गलत से इनको कोई मतलब नहीं होता। तीसरा सच यह कि पैसा आपको सफल बना सकता है लेकिन सभ्य नहीं।


मोना आज़ाद

लेखक व सोशल एक्टिविस्ट, उत्तर प्रदेश

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