लैलतुल क़द्र : एक अनमोल उपहार
उपहार का महत्व
उपहार केवल एक वस्तु नहीं होता, बल्कि वह भावना, अपनापन और रिश्तों की मिठास का प्रतीक होता है। इंसान अपनी खुशी, आभार, प्रेम और सम्मान को व्यक्त करने के लिए उपहार देता है। उपहार दिलों को जोड़ने का माध्यम है। एक छोटा-सा तोहफ़ा भी रिश्तों में गर्मजोशी पैदा करता है और यह एहसास दिलाता है कि सामने वाला व्यक्ति हमारे लिए विशेष है।
उपहार अपने आप मे एक भावनात्मक आकर्षण रखता है भले यह किसी सामान्य व्यक्ति की तरफ से हो। लेकिन जब यह उपहार किसी बड़ी हस्ती की ओर से मिले, तो उसकी महत्ता और भी ज्यादा बढ़ जाती है। हर समाज और संस्कृति में उपहार देने की परंपरा रही है। यह इंसानी फ़ितरत का हिस्सा है कि वह उपहार के माध्यम से प्रेम भावना को प्रस्तुत और संबंधों को मजबूत करता है।
एक अनमोल उपहार
ईश्वर अपने बंदों से बहुत प्रेम करता है, उसने अपने प्रिय बंदों को एक अनमोल उपहार दिया है। जिसे हम कुरआन के नाम से जानते है। जिस रात मे यह उपहार दिया गया उस रात को लैलतुल क़द्र कहा जाता है। इस रात मे अल्लाह की विशेष कृपाएं दुनिया पर छाई रहती है। इसी लिए लैलतुल क़द्र को भी एक महान उपहार माना जाता है। यूं तो रमज़ान की सभी रातें मुबारक और पूर-नूर होती हैं लेकिन लैलतुल क़द्र (कदर वाली रात) विशेष रात है जो अपने भीतर रहमत, मग़फिरत और निजात का ख़ज़ाना समेटे हुए है। यह केवल एक रात नहीं, बल्कि रब-ए-करीम की ओर से ऐसा महान उपहार है जो बंदे को कम समय में बेशुमार नेकियाँ समेटने का अवसर प्रदान करता है।
क़ुरआन मजीद में लैलतुल क़द्र की महानता जिस सुंदर और प्रभावशाली अंदाज़ में बयान की गई है, उससे स्पष्ट होता है कि यह रात इंसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि इंसानी सोच से भी कहीं अधिक महान है। इसे हज़ार महीनों से बेहतर कहा गया है। इस रात अल्लाह की विशेष कृपा और रहमत की वर्षा होती है तथा इसकी फ़ज़ीलत आसमानों से फ़रिश्तों के उतरने से और बढ़ जाती है।
यह वह रात है जिसमें इंसानों की किस्मत के फ़ैसले तय किए जाते हैं और उनसे संबंधित अनेक मामलों का निर्णय होता है। यह दुआओं और इबादत की स्वीकार्यता की रात है। लैलतुल क़द्र में अल्लाह की ओर से तरक़्क़ी के दरवाज़े खुलते हैं और यह उन बंदों के लिए वास्तविक उन्नति का अवसर बनती है जो अल्लाह की प्रसन्नता चाहते हैं।
लैलतुल क़द्र की सबसे बड़ी अज़मत यह है कि इसी रात क़ुरआन मजीद नाज़िल हुआ। यही वह महान उपहार है जिसके माध्यम से इंसान को जीवन का सही मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का रास्ता मिला एवं सत्य और असत्य में अंतर करने की समझ मिली।
रेगिस्तान मे भटके हुए किसी व्यक्ति से पूछा जाए की जीवन की सुरक्षा के लिए धन दौलत का महत्व ज्यादा है या रणप्रदेश से निकलने का मार्ग ज्यादा महत्वपूर्ण है? वह इस बात से सहमत होगा कि भौतिक सुविधाओ की तुलना मे मार्गदर्शन का महत्व ज्यादा है। क्योंकि सारी सुविधाए समाप्त हो गई तो वो भूखा प्यासा मर जायगा लेकिन अगर उसे रास्ता मिल गया तो सुविधा बाद मे भी जुटा सकेगा। इसी लिए क़ुरआन को सबसे बड़ा उपहार कहा गया है क्योंकि वह दुनिया की भूल भुलैयों मे ईश्वरीय मार्गदर्शन है जो जीवन की वास्तविक मंजिल तक पहुचने का मार्ग दिखाता है। लैलतुल क़द्र उसी मार्गदर्शन के अवतरण की रात है, इसलिए इसकी महत्ता असाधारण है।
कुरआन मजीद की कुछ विशेषताएँ
यद्पि कुरआन मजीद अनगिनत गुणों और विशेषताओं का संगम है, फिर भी यहाँ संक्षेप में इसकी कुछ प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया जा रहा है, ताकि इस महान ग्रंथ की महत्ता, उपयोगिता और गरिमा को आसानी से समझा जा सके।
कुरआन ने मनुष्य को उसकी सृष्टि के उद्देश्य से परिचित कराया। उसने स्पष्ट किया कि इंसान केवल खाने-पीने और सांसारिक सुखों के लिए पैदा नहीं किया गया, बल्कि उसे एक जिम्मेदार और उत्तरदायी अस्तित्व के रूप में दुनिया में भेजा गया है। इस चेतना ने मानव जीवन को अर्थपूर्ण और सम्मानजनक बना दिया।
कुरआन ने केवल सैद्धांतिक या दार्शनिक बातें ही नहीं कीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र के लिए स्पष्ट और संतुलित मार्गदर्शन प्रदान किया। कुरआन ने मनुष्य को केवल एक ईश्वर के आगे झुकने का संदेश ही नहीं दिया बल्कि मानवता को भी एक लड़ी मे पिरोने का काम किया है। उसने मानवीय गरिमा का आदर करना सिखाया और उनकी सेवा को भी धार्मिक कर्तव्य का दर्जा दिया गया।
यह ग्रंथ समाज के कमजोर वर्गों-गरीबों, जरूरतमंदों, अनाथों और वंचितों की सहायता को परलोक की सफलता का माध्यम बताता है। महिलाओं को संपत्ति, विवाह और सामाजिक सम्मान के अधिकार देकर उन्हें समाज में उनका उचित स्थान प्रदान करता है,और उन्हें समाज का अभिन्न अंग घोषित करता है। नैतिकता के क्षेत्र में धैर्य, क्षमा, उदारता, साहस, ईमानदारी, वचन-पालन और सत्यनिष्ठा जैसी उच्च गुणों की शिक्षा देकर चरित्र निर्माण की मजबूत नींव रखता है।
कुरआन ने शांति और संघर्ष दोनों परिस्थितियों के लिए न्यायसंगत और संतुलित सिद्धांत दिए, ताकि मानव समाज संतुलन और न्याय के साथ आगे बढ़ सके। उसने मृत्यु के बाद की जीवन-यात्रा, कर्मों का हिसाब और परिणाम को स्पष्ट रूप से बयान किया, जिससे मनुष्य में उत्तरदायित्व की भावना जागृत होती है। नेक लोगों के लिए शाश्वत आनंद और ईश्वर के सान्निध्य की शुभ सूचना दी, जो सबसे बड़ी सफलता है।
लैलतुल क़द्र की महानता
लैलतुल क़द्र जहां कुरआन मे विचार मनन करने का उत्तम समय है वही ईश्वर का सानिध्य प्राप्त करने का भी शुभ अवसर है। इस रात मे हमे ईश्वर का जिक्र करने, पश्चाताप करने, दान करने का शिक्षण दिया गया है वही हमे अपने जीवन को बेहतर दिशा की तरफ ले जाने के लिए आत्मचिंतन करने का संकेत भी दिया गया है। लैलतुल कदर की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि इस की निश्चित तारीख स्पष्ट नहीं बताई गई बल्कि इसे तलाश करने की प्रेरणा दी गई है। यह तलाश ही बंदे को निरंतर ईबादत, जागरूकता, आधयात्मिक प्रयास की ओर ले जाती है। सही बुखारी में वर्णित है कि हज़रत मुहम्मद सल्ल अलैहि व सल्लम ने फरमाया :
"लैलतुल कदर को रमजान के आखिरी दस दिनों में तलाश करो।"
इस हिदायत में बड़ी हिकमत है। अगर दिन या तारीख तय कर दी जाती तो इंसान केवल उसी पर निर्भर हो जाता, लेकिन तलाश की भावना उसे पूरे आखिरी अशरे में इबादत में सक्रिय रखती है। खुद हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब रमजान का आखिरी अशरा शुरू होता तो रातों को अधिक जागते, इबादत में विशेष मेहनत करते, अपने घर वालों को भी जागते और सांसारिक व्यस्ततओं से अलग होकर इबादत पर ध्यान देते।
सहाबा ए किराम रजि़अल्लाहु अनहुम भी लैलतुल कद्र की तलाश में पूरे आखिरी अशरे में इबादत में मशगूल रहते उनके लिए यह एक रात नहीं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का अभियान होता, वे नमाज, दुआ, तिलावत और आत्ममंथन के माध्यम से इस कीमती रात को पाने की कोशिश करते।
लैलतुल कदर की तलाश असल में इंसान का रुहानी सफर है जिसके द्वारा इंसान अपने रब से करीब होता है और उसके नेक और पसंदीदा बंदों में शामिल होकर दुनिया व आखिरत में कामयाबी हासिल करने में सफल हो जाता है। इस प्रकार से लैलतुल क़द्र सचमुच इंसानियत के लिए रब का सबसे अनमोल उपहार है।
आरिफ़ा परवीन
प्रधान संपादक, आभा ई मैग्ज़ीन