नबी करीम सल्ल० पूरी दुनिया के लिए रहमत
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दिव्य ज्योति
नबी करीम सल्ल० पूरी दुनिया के लिए रहमत

अल्लाह तआला इंसान को जब इस दुनिया में भेजता है तो उसकी हर एक छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी आवश्यकताओं की व्यवस्था कर के भेजता है। यही कारण है कि जब उसने इंसान को दुनिया में भेजा तो उन्हें बेहतर ज़िंदगी गुज़ारने के लिए सोचने समझने की क्षमता दी और साथ ही सही मार्ग दिखाने की पूरी व्यवस्था भी की। उसने इसांन को सही मार्ग पर चलाने के लिए समय समय पर ऐसे महान लोग भेजे जो उसका संदेश इंसानों तक पहुंचाते रहे। नेकी का हुक्म देते रहे और बुराई से रोकते रहे। हर तरह के बिगाड़ के सुधार की ज़िम्मेदारी उनकी थी। इंसानों की कोई बस्ती ऐसे महान लोगों से वंचित नहीं रही एवं कोई दौर ऐसे नेक इंसानों से खाली नहीं रहा।

कुरआन में अल्लाह तआला कहते हैः-

और कोई कौम नहीं मगर उसमें डराने वाला गुज़र चुका (सूरह अल फ़ातिर)

और हर क़ौम के लिए एक रास्ता दिखाने वाला है।

इंसान गुमराह होता रहा और उसको सुधारने की व्यवस्था भी होती रही। वह मानसिक, सामजाकि एवं सांस्कृतिक रुप से जैसे जैसे विकास करता रहा उसके लिए रास्ता दिखाने वाला भी समय समय पर आता रहा। ताकि इंसान विचार विमर्श करके विकास के नित नए आयाम तक पहुंचे। इसी प्रकार जब कुरआन नाज़िल करने का दौर आया तो अल्लाह ने हज़रत मुहम्मद सल्ल० को कुरआन का जीवंत नमूना बनाकर भेजा ताकि वह इंसानों को गुमराही से निकालकर सही मार्ग दिखा सकें। चूंकि आप सल्ल० को अंतिम नबी बनाकर भेजा इसलिए आप सल्ल० के किरदार में पहले गुज़र चुके नबियों की विशेषताएं तो शामिल की हीं साथ ही कुछ विशेष खूबियां भी दीं जो कि अन्य किसी नबी में नहीं पायी गईं। आप सल्ल० की नबूवत पूरी दुनिया के लिए थी और आप सल्ल० का दीन भी पूरी दुनिया और कयामत तक रहने वाला है। इसलिए इस विशेषता की विशेष आवश्यकता थी जिसे अल्लाह ने पूरा किया।

“हम ने आप सल्ल० को सारी दुनिया के लिए रहमत बनाकर भेजा है” (सूरह अल-अंबिया)

आप सल्ल० अपने किरदार के हिसाब से पूरी तरह रहमत थे। उनके निजी जीवन में भी यह विशेषता देखने को मिलती है और सामाजिक जीवन में भी उनका चरित्र लोगों के प्रति हमदर्दी, प्यार और भाईचारे का जीवंत उदाहरण पेश करता है। नबूवत मिलने से पहले भी उनका काम इंसानियत के प्रति दया का रहा, वह बेसहारा लोगों के लिए रहमत बनकर खड़े रहते थे और ऐलान-ए-नबूवत के बाद भी उन्होंने रहमत की वह ज़िंदा मिसाल कायम की जो समूचे विश्व के लिए जीवंत उदाहरण बन गया।

ताइफ की घाटी में जिस प्रकार उन पर पत्थर पड़े, बुरे से बुरा व्यवहार हुआ और उसके बाद आप सल्ल० का यह कहना कि “ऐ अल्लाह मेरी कौम को हिदायत दे निसंदेह वह नहीं जानते।” दया एवं उच्च व्यवहार का ऐसा सर्वोच्च उदाहरण है जो कहीं और देखने को मिल ही नहीं सकता।

रहमत की यह विशेषता आप सल्ल० के संपूर्ण जीवन में उठते बैठते, निर्णय लेते हर ओर देखने को मिलेगी। फिर चाहे मक्का के दौर में गुलामों की आज़ादी का प्रयास हो और मदीना के दौर में मुनाफिक़ों (गद्दारों) के ज़नाज़े में जाने का मामला, मदीना के यहूदियों और नजरान के ईसाईयों के साथ आपका उच्च व्यवहार, मक्का की जीत के समय दुश्मनों को माफ करने का मामला हर जगह आप सल्ल० हमदर्दी व रहमत का सबूत पेश करने वाले बने। 

इस समय समूचे विश्व को आवश्यकता है कि वे हज़रत मुहम्मद सल्ल० के नक्शे कदम पर चलते हुए दुनिया को प्रेम, दया एवं भाईचारे का संदेश दें। इसके लिए प्रयास करें और दुनिया के नक्शे से नफरत का अंत करें ताकि शांति एवं भाईचारे की स्थापना हो सके। आप सल्ल० ने अपने चरित्र एवं व्यवहार का जो नमूना पेश किया दुनिया को उससे लाभ मिल सके।

- रुश्दा फ़रहीन

- आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश

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